बिहार में अकेले चुनाव लड़ेगी आम आदमी पार्टी,केजरीवाल ने I.N.D.I.A. गठबंधन से बनाई दूरी

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आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी बिहार में आगामी चुनाव अकेले लड़ेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि I.N.D.I.A. गठबंधन केवल लोकसभा चुनाव के लिए था और अब पार्टी का किसी भी राजनीतिक दल से कोई गठबंधन नहीं है।

गुरुवार को गुजरात के अहमदाबाद में दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी के सदस्यता अभियान की शुरुआत करते हुए यह बात कही।

“गुजरात में विकल्प बन चुकी है AAP”: केजरीवाल

केजरीवाल ने कहा कि गुजरात के विसावदर उपचुनाव में उनकी पार्टी ने कांग्रेस से अलग होकर चुनाव लड़ा और पहले की तुलना में तीन गुना ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की। उन्होंने इसे लोगों के गुस्से और बदलाव की चाह का संकेत बताया।

“बीजेपी ने गुजरात को बर्बाद कर दिया है। सूरत समेत कई शहर जलमग्न हैं, किसान, व्यापारी और युवा सब परेशान हैं। कांग्रेस सिर्फ बीजेपी को जिताने का ठेका निभा रही है। अब आम आदमी पार्टी एक मजबूत विकल्प के रूप में सामने आई है।”

कांग्रेस पर आरोप, गठबंधन से इनकार

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि विसावदर उपचुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी के इशारे पर वोट काटने की कोशिश की, लेकिन असफल रही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इसके लिए बीजेपी से डांट भी पड़ी।

I.N.D.I.A. गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर केजरीवाल ने साफ किया कि यह केवल लोकसभा चुनाव के लिए था और अब AAP की कोई साझेदारी नहीं है।

“मुझे दो साल दीजिए”: गुजरात में युवाओं से जुड़ने की अपील

केजरीवाल ने सदस्यता अभियान के तहत 9512040404 नंबर जारी करते हुए युवाओं से AAP से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा:

“मुझे सिर्फ दो साल दीजिए। ये एक हवन है, इसमें अपनी आहुति दीजिए। अगर गुजरात का विकास करना है तो आम आदमी पार्टी के साथ आइए।”

उन्होंने आगे कहा कि विसावदर की जीत कोई मामूली जीत नहीं बल्कि 2027 के चुनाव का सेमीफाइनल है।

दिल्ली-पंजाब पर भी दिया जवाब

दिल्ली में हालिया हार पर केजरीवाल ने कहा कि ऊपर-नीचे चलता रहता है, और भरोसा जताया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार फिर से बनेगी।

गुजरात में अपने दौरे के जरिए केजरीवाल ने स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि उनकी पार्टी अब राष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प के रूप में आगे बढ़ रही है, जो परंपरागत पार्टियों को सीधी चुनौती देने के लिए तैयार है।