कोटा, 4 सितम्बर। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि आदिवासी समाज ने पीढ़ियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा कर भारत की धरोहर और पर्यावरण को सुरक्षित रखा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय का जीवन संघर्षों से भरा रहा है, इसलिए उन्हें न्यायपूर्ण सम्मान और सुविधाएं मिलनी चाहिए। बिरला ने कहा कि आने वाले वर्षों में हर गांव तक पेयजल, सड़क, आवास, शौचालय, गैस कनेक्शन और स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाई जाएंगी।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम गुरुवार को कोटा के जवाहर नगर में आयोजित आदिवासी जनजाति गौरव सम्मेलन में शामिल हुए। बिरला ने कहा कि हर गांव में युवाओं की टीम तैयार कर उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे सरकारी योजनाओं की जानकारी और लाभ हर पात्र परिवार तक पहुँचा सकें। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी पूरी करने के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, खाद्य सुरक्षा और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ भी समय पर दिया जाएगा। इस अवसर पर लाडपुरा विधायक कल्पना देवी, भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश जैन, जिलाध्यक्ष देहात प्रेम गोचर, जिलाध्यक्ष बूंदी रामेश्वर मीणा उपस्थित रहे।
बिरला ने कहा कि आदिवासी बेटियों की शिक्षा के लिए नए छात्रावास स्थापित किए जाएंगे, जहाँ उन्हें नि:शुल्क सुविधा मिलेगी। आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर महिलाओं और बच्चों को बेहतर सुविधाएं दी जाएंगी। महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देकर गांव-गांव में रोजगार और आत्मनिर्भरता का वातावरण तैयार किया जाएगा।
आदिवासी कल्याण के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट प्रावधान : ओराम
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी आदिवासी मामलों के लिए अलग मंत्रालय नहीं था, लेकिन अब केंद्र में आदिवासी समाज के विकास के लिए समर्पित मंत्रालय और आयोग काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस वर्ष आदिवासी कल्याण के लिए 1.20 लाख करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है, जो अब तक का सबसे बड़ा है।
ओराम ने कहा कि देशभर में 740 से अधिक एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्वीकृत किए गए हैं, जहाँ कक्षा 6 से 12 तक बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा मिलेगी। उन्होंने अपने जीवन संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे स्वयं गरीबी और कठिनाइयों से आगे बढ़े हैं, इसलिए आदिवासी समाज की पीड़ा को गहराई से समझते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, सड़क, पानी, स्वास्थ्य और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता से पूरा किया जाएगा।

