किशाऊ बांध परियोजना पर छह राज्यों के बीच समझौता,राजस्थान के शेखावाटी को मिलेगा पानी

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नई दिल्ली/जयपुर, 15 सितंबर। किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर मंगलवार को नई दिल्ली में राजस्थान समेत छह राज्यों के बीच समझौता हुआ। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।

करीब चार दशक से लंबित इस परियोजना को लेकर अमित शाह ने इसे अंतर-राज्यीय सहयोग और ‘टीम इंडिया’ की भावना का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में राज्यों के बीच संवाद के जरिए लंबे समय से अटके जल विवादों को सुलझाने की कोशिश की गई है।

राजस्थान को 124 एमसीएम पानी मिलने की योजना

राजस्थान सरकार के मुताबिक किशाऊ परियोजना से मिलने वाला पानी प्रदेश के जल संकट वाले शेखावाटी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण होगा। राजस्थान को परियोजना से 124 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी आवंटित किया गया है।

इस पानी को यमुना जल परियोजना के तहत हरियाणा के हांसी-बुटाना क्षेत्र से चूरू तक भूमिगत पाइपलाइन के जरिए पहुंचाने की योजना है। इससे सीकर, चूरू और झुंझुनूं सहित आसपास के इलाकों में पेयजल और अन्य जरूरतों के लिए पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने समझौते को राजस्थान की जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यमुना जल समझौते, रामजल सेतु लिंक परियोजना, नर्मदा जल समझौते और अब किशाऊ परियोजना के जरिए राज्य में लंबे समय से लंबित जल संबंधी मुद्दों का समाधान आगे बढ़ रहा है।

15 हजार करोड़ की परियोजना, 660 मेगावाट बिजली

किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित है। राजस्थान सरकार के मुताबिक परियोजना की लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये है और इससे 660 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन होगा।

अमित शाह ने बताया कि परियोजना के तहत टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम बनाया जाएगा। इसमें करीब 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी का भंडारण होगा। परियोजना से करीब 97 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत उत्पादन का अनुमान है।

परियोजना को भारत सरकार ने राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया है। इसके जल घटक की लागत का करीब 90 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि बाकी 10 फीसदी राशि संबंधित राज्यों की ओर से दी जाएगी।

दिल्ली और यमुना के लिए भी अहम

अमित शाह ने कहा कि परियोजना से मिलने वाले पानी का एक हिस्सा दिल्ली और यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह के लिए भी महत्वपूर्ण होगा। उनके मुताबिक यमुना के पानी के पुराने बंटवारे में नदी के पर्यावरणीय प्रवाह का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया था।

उन्होंने कहा कि किशाऊ परियोजना से मिलने वाला अतिरिक्त पानी दिल्ली की पेयजल जरूरतों के साथ-साथ यमुना के पर्यावरण को बेहतर करने में मदद कर सकता है।

32 साल से लंबित राजस्थान का पानी

राजस्थान सरकार ने कहा है कि 1994 में हुए यमुना जल समझौते के तहत राजस्थान को मानसून अवधि में 1,917 क्यूसेक यानी करीब 577 एमसीएम पानी आवंटित किया गया था। हालांकि पानी पहुंचाने के लिए जरूरी व्यवस्था नहीं होने के कारण राज्य को लंबे समय से अपने हिस्से का पूरा लाभ नहीं मिल पाया।

सरकार का कहना है कि किशाऊ परियोजना और यमुना जल से जुड़ी योजनाओं के साथ शेखावाटी के लिए दीर्घकालीन जल सुरक्षा का आधार मजबूत होगा। पर्याप्त पानी मिलने से क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई के साथ आर्थिक गतिविधियों, रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई है।

अमित शाह ने समझौते को ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ की भावना का उदाहरण बताया और कहा कि सभी छह राज्य परियोजना को जल्द पूरा करने के लिए मिलकर काम करेंगे।