उत्तराखंड के केदारनाथ में शनिवार सुबह एक एयर एंबुलेंस हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। राहत की बात यह रही कि हेलिकॉप्टर में सवार तीनों लोग—पायलट, डॉक्टर और नर्स—पूरी तरह सुरक्षित हैं। यह हेलिकॉप्टर ऋषिकेश स्थित एम्स अस्पताल से एक मरीज को लेने के लिए केदारनाथ पहुंचा था।
एम्स के जनसंपर्क अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि संजीवनी एयर एंबुलेंस सेवा का यह हेलिकॉप्टर केदारनाथ में लैंडिंग के दौरान अचानक नियंत्रण खो बैठा और जमीन से टकरा गया। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि दुर्घटना हेलिकॉप्टर की ‘टेल रोटर’ टूटने के कारण हुई।
रुद्रप्रयाग के जिला पर्यटन अधिकारी राहुल चौबे ने कहा कि पायलट की तत्परता और सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टल गया। हेलिकॉप्टर लैंडिंग से ठीक पहले गिरा, लेकिन उसमें सवार सभी लोग सुरक्षित निकल आए।
हालिया हादसों की पृष्ठभूमि
यह दुर्घटना ऐसे समय हुई है जब उत्तराखंड में नौ दिन पहले ही एक बड़ा हेलिकॉप्टर हादसा हुआ था। 8 मई को उत्तरकाशी के गंगनानी क्षेत्र में एक हेलिकॉप्टर क्रैश में छह लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें पायलट और पांच यात्री शामिल थे। मृतकों में एक मां-बेटी भी थीं, जो बरेली की रहने वाली थीं।
वह हेलिकॉप्टर गुजरात स्थित एरोटांस सर्विस प्राइवेट लिमिटेड का बेल वीटी-क्यूएक्सएफ (Bell VT-QXF) मॉडल था और गंगोत्री धाम जा रहा था। दुर्घटनास्थल समुद्र तल से करीब 2600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित था, जहां राहत और बचाव दलों ने तीन घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया था।
हादसे के बाद प्रशासन ने एहतियातन केदारनाथ के लिए चल रही सभी हेलिकॉप्टर सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी थीं, जिसमें गुप्तकाशी, सिरसी और फाटा हेलीपैड से उड़ानें भी शामिल थीं।
निष्कर्ष
हालिया घटनाएं एक बार फिर उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था और जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर रही हैं। हालांकि केदारनाथ की ताजा घटना में कोई जान का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन यह स्पष्ट संकेत देती है कि तकनीकी जांच और सुरक्षा मानकों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

