संसद के मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक,विपक्ष का वॉकआउट;सरकार ने सहयोग की अपील,विपक्ष ने उठाए कई मुद्दे

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नई दिल्ली:-संसद के मानसून सत्र से एक दिन पहले रविवार को केंद्र सरकार ने नई दिल्ली स्थित संसद परिसर में सर्वदलीय बैठक बुलाई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में 40 राजनीतिक दलों के 58 नेताओं ने हिस्सा लिया। संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने सभी दलों से संसद के सुचारु संचालन में सहयोग की अपील की और कहा कि सरकार नियमों के तहत सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है।

बैठक में बताया गया कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा, जिसमें कुल 19 बैठकें होंगी। सरकार ने विधायी कार्यसूची पहले ही जारी कर दी है। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में एफसीआरए संशोधन, आयकर संशोधन, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, न्यायाधीशों की संख्या, वंदे मातरम् और एमएसएमई से जुड़े विधेयकों पर चर्चा के लिए समय भी तय किया गया।

हालांकि बैठक के दौरान विपक्षी दलों ने सांकेतिक वॉकआउट किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, वाम दलों और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि टीएमसी से अलग हुए 20 सांसदों के समूह (NCPI) को सर्वदलीय बैठक में बुलाया गया, जबकि उन्हें अभी तक औपचारिक मान्यता नहीं मिली है। विपक्ष ने इसे संसदीय परंपराओं के खिलाफ बताया।

इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि मामला लोकसभा अध्यक्ष के विचाराधीन है, लेकिन जब 20 सांसदों का समूह मौजूद है तो सरकार सभी पक्षों से संवाद करने के लिए उन्हें आमंत्रित कर सकती है। उन्होंने कहा कि “लोकसभा सभी की है और सहमति बनाने के लिए सभी दलों से बातचीत जरूरी है।”

बैठक में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के अध्यक्ष और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी कई जनहित के मुद्दे उठाए। उन्होंने नीट पेपर लीक, सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं, किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और साइबर अपराध पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की।

बेनीवाल ने राजस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी चिंता जताते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत और गंभीर चिकित्सकीय घटनाओं पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से स्थिति की समीक्षा करने की मांग की। इसके अलावा उन्होंने रावी-व्यास जल विवाद, चिनाब नदी का पानी पश्चिमी राजस्थान तक लाने, किसानों को खनन पट्टे देने, भाखड़ा व्यास प्रबंधन बोर्ड में राजस्थान का प्रतिनिधित्व बढ़ाने और खेजड़ी के पेड़ों की कटाई रोकने जैसे मुद्दे भी उठाए।

बैठक के समापन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सभी दलों का धन्यवाद देते हुए संसद के आगामी सत्र को रचनात्मक और सार्थक बनाने की अपील की। वहीं, सरकार और विपक्ष दोनों ने संकेत दिए हैं कि मानसून सत्र में शिक्षा, कृषि, कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य और कई अन्य राजनीतिक मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।