भारत में स्वदेशी रूप से विकसित किए जा रहे 5वीं पीढ़ी के स्टेल्थ लड़ाकू विमान एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के प्रोडक्शन मॉडल को केंद्र सरकार ने हरी झंडी दे दी है। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी।
सरकार ने बताया कि इस परियोजना में सार्वजनिक क्षेत्र के साथ-साथ निजी कंपनियों को भी भाग लेने का मौका दिया जाएगा। एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) जल्द ही इसके लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) जारी करेगी।
इस घोषणा के बाद रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज़ी देखी गई और निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर 8,674.05 तक पहुंच गया।
स्वदेशी फाइटर जेट परियोजना को मिला समर्थन
AMCA परियोजना को अप्रैल 2024 में कैबिनेट की सुरक्षा समिति (CCS) ने मंजूरी दी थी। इसके तहत करीब 15,000 करोड़ रुपये की लागत से इस फाइटर जेट के डिजाइन और विकास का रास्ता साफ हुआ था।
इस कार्यक्रम की जिम्मेदारी रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के अधीन आने वाली एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) को सौंपी गई है। विमान का निर्माण भारत की सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) करेगी, जो पहले से ही तेजस फाइटर जेट का निर्माण कर रही है।
AMCA के विकास से भारत को ट्विन इंजन स्टेल्थ फाइटर जेट के लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसे भारतीय वायुसेना और नौसेना, दोनों में शामिल किए जाने की योजना है।
क्या होगा AMCA की खासियत?
AMCA भारत में विकसित होने वाला दूसरा स्वदेशी लड़ाकू विमान होगा। इससे पहले LCA तेजस और उसका उन्नत संस्करण तेजस MK-1A विकसित किया जा चुका है।
यह विमान स्टेल्थ टेक्नोलॉजी से लैस होगा, जिससे यह दुश्मन के रडार से बच सकेगा। साथ ही यह कई तरह के आधुनिक हथियारों को ढोने की क्षमता भी रखेगा। उम्मीद है कि यह विमान 2035 तक ऑपरेशनल हो जाएगा।
भारतीय वायुसेना में पहले से तैनात है तेजस
भारतीय वायुसेना फिलहाल हल्के लड़ाकू विमान तेजस MK-1 का इस्तेमाल कर रही है। जुलाई 2023 में इसे जम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा एयरबेस पर तैनात किया गया था। इसका मकसद पायलटों को घाटी की चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में उड़ान भरने का प्रशिक्षण देना था।
फिलहाल वायुसेना के पास 31 तेजस विमान हैं। यह विमान अपने मल्टीरोल क्षमता, हल्के वजन और कम रनवे की ज़रूरत की वजह से विशेष माना जाता है।
तेजस की चार बड़ी खूबियां
- इस विमान के 50% पुर्जे भारत में ही बनाए गए हैं।
- इसमें इजरायली EL/M-2052 रडार लगाया गया है, जो एक साथ 10 लक्ष्यों को ट्रैक और निशाना साध सकता है।
- यह सिर्फ 460 मीटर लंबे रनवे से उड़ान भर सकता है।
- इसका वजन मात्र 6,500 किलो है, जो सुखोई, राफेल, मिराज और मिग जैसे विमानों से कहीं हल्का है।

