राजस्थान के नगर निकाय चुनावों के नतीजों को लेकर कांग्रेस ने सत्तारूढ़ बीजेपी पर निशाना साधा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने दावा किया है कि निकाय चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच वोट शेयर का अंतर एक फीसदी से भी कम रहा है।
जयपुर में सोमवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डोटासरा ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में आम तौर पर सत्ताधारी दल को बढ़त मिलने की उम्मीद होती है, लेकिन इस बार बीजेपी को अपेक्षित फायदा नहीं मिला।
उन्होंने दावा किया कि अगर उनके मुताबिक किए गए “मनमाने परिसीमन” को अलग रखकर चुनाव परिणामों का विश्लेषण किया जाए तो कांग्रेस बीजेपी से करीब 1,500 वार्ड ज्यादा जीत सकती थी।
बीजेपी के वोट शेयर में गिरावट का दावा
डोटासरा ने 2023 के विधानसभा और उसके बाद लोकसभा चुनाव के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि इन 188 विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी का वोट शेयर विधानसभा चुनाव में 42.41 फीसदी था, जो लोकसभा चुनाव में बढ़कर 50.14 फीसदी हुआ था।
उनके मुताबिक, मौजूदा निकाय चुनावों में बीजेपी का वोट शेयर घटकर करीब 35.3 फीसदी रह गया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह आंकड़े राज्य सरकार के कामकाज को लेकर जनता के रुख को दिखाते हैं। हालांकि, ये आंकड़े और उनका विश्लेषण कांग्रेस की ओर से प्रस्तुत किए गए हैं।
आरक्षित वार्डों के नतीजों का भी जिक्र
डोटासरा ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित वार्डों के नतीजों का जिक्र करते हुए बीजेपी पर निशाना साधा।
उन्होंने दावा किया कि एससी आरक्षित वार्डों में कांग्रेस ने 542 वार्ड जीते, जबकि बीजेपी को 350 वार्ड मिले। एससी महिला आरक्षित वार्डों में कांग्रेस ने 261 और बीजेपी ने 186 वार्ड जीते।
एसटी महिला आरक्षित वार्डों में कांग्रेस ने 53 और बीजेपी ने 39 वार्ड जीतने का दावा किया।
डोटासरा ने इन नतीजों को बीजेपी की दलित और आरक्षण संबंधी नीतियों से जोड़ते हुए कहा कि मतदाताओं ने चुनाव में इसका जवाब दिया है।
परिसीमन को लेकर कांग्रेस के गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता ने निकायों के वार्ड परिसीमन पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने दावा किया कि कुछ वार्डों में मतदाताओं की संख्या में बहुत ज्यादा अंतर था। डोटासरा के मुताबिक, कुछ वार्डों में करीब 4,000 मतदाता थे, जबकि कुछ में यह संख्या 35,000 तक पहुंच गई।
उन्होंने दावा किया कि बीजेपी ने जिन 4,097 वार्डों में जीत दर्ज की, उनमें से 1,316 वार्डों में जीत का अंतर 100 वोट से कम था। इनमें 772 वार्डों में अंतर 50 वोट से भी कम और 13 वार्डों में बीजेपी सिर्फ एक वोट से जीती।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इन मामलों में पुनर्मतगणना की मांग की थी और कुछ जगहों पर परिणाम रोककर रखे गए। हालांकि, इन आरोपों पर बीजेपी का पक्ष इस बयान में सामने नहीं आया है।
जयपुर, जोधपुर और बीकानेर का उदाहरण
डोटासरा ने कई प्रमुख शहरों के नतीजों को कांग्रेस के पक्ष में बताया।
उन्होंने कहा कि अजमेर के 80 वार्डों में कांग्रेस ने 37 और बीजेपी ने 32 वार्ड जीते हैं। पाली में कांग्रेस के 29 और बीजेपी के 21 वार्ड जीतने का दावा किया गया।
बीकानेर में कांग्रेस ने 80 में से 42 वार्ड जीतने का दावा किया है। डोटासरा ने कहा कि इससे वहां कांग्रेस का बोर्ड बनने की स्थिति बनी है।
जोधपुर में भी उन्होंने कांग्रेस के 45 और बीजेपी के 44 वार्ड जीतने की बात कही। उनके मुताबिक, जोधपुर में कांग्रेस का वोट शेयर 42.7 फीसदी और बीजेपी का 39.8 फीसदी रहा।
जयपुर के नतीजों पर भी कांग्रेस का दावा
डोटासरा ने जयपुर नगर निकाय चुनाव के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि कांग्रेस को बीजेपी से 10 हजार से ज्यादा वोट मिले हैं, लेकिन बीजेपी ज्यादा वार्ड जीतने में सफल रही।
उन्होंने जयपुर के अलग-अलग वार्डों में मतदाताओं की संख्या में बड़े अंतर का उदाहरण देते हुए परिसीमन पर फिर सवाल उठाए।
डोटासरा ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जिन कई क्षेत्रों में चुनाव प्रचार किया था, वहां बीजेपी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
पंचायत चुनाव को लेकर कांग्रेस का दावा
गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि निकाय चुनाव के नतीजे आने वाले पंचायत चुनावों के लिए भी संकेत हैं।
उन्होंने दावा किया कि आगामी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ेगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि शहरी निकायों को बीजेपी और आरएसएस का मजबूत आधार माना जाता है, लेकिन इन चुनावों के नतीजे सरकार की लोकप्रियता पर सवाल खड़े करते हैं।
कांग्रेस ने निकाय चुनावों के नतीजों को राज्य सरकार के कामकाज के खिलाफ जनादेश बताया है, जबकि बीजेपी पहले ही इन परिणामों को अपनी नीतियों और सरकार के काम पर जनता के भरोसे की जीत बता चुकी है।

