कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर बीजेपी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि तीन दिन बीतने के बावजूद धनखड़ के इस्तीफे पर न तो खुद उन्होंने कुछ कहा और न ही किसी बीजेपी नेता ने उनकी कुशलक्षेम पूछी। डोटासरा ने तंज कसते हुए कहा कि क्या कोई केंद्रीय मंत्री उनके हालचाल लेने गया है?
पीसीसी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए डोटासरा ने आरोप लगाया कि बीजेपी का मॉडल है—हर संवैधानिक पद पर अपने “पपेट” बैठाओ और जब वे संविधान के अनुसार काम करने लगें, तो उन्हें हटा दो। उन्होंने कहा कि यही हालात दिल्ली और राजस्थान में देखने को मिल रहे हैं।
डोटासरा ने धनखड़ को “राजस्थान का सपूत” बताते हुए कहा कि उनका इस्तीफा लेना या उन्हें इस्तीफे के लिए मजबूर करना पूरे राज्य का अपमान है। उन्होंने इसे “तानाशाही सरकार” की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल बताया और कहा कि लोकतंत्र और संविधान के लिए यह खतरनाक संकेत है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी पहले किसानों, दलितों, पिछड़ों और गरीब सवर्णों से वोट लेती है और फिर उनके नेताओं को सिर्फ इस्तेमाल करती है। डोटासरा के मुताबिक, जैसे ही ये नेता स्वतंत्र राय रखने लगते हैं, उन्हें हटा दिया जाता है।
डोटासरा ने पंचायत चुनावों को लेकर राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री अविनाश गहलोत पर भी निशाना साधा और पूछा कि वह कौन होते हैं पंचायत चुनावों की तारीख तय करने वाले। उन्होंने दावा किया कि दिसंबर में चुनाव कराना असंभव है क्योंकि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट तब तक नहीं आएगी।
सरकार पर ट्रांसफर उद्योग चलाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि ट्रांसफर लिस्ट में “बड़ी पर्चियां” कट रही हैं, लेकिन इसका पैसा कहां जा रहा है, यह कोई नहीं बता पा रहा।
उन्होंने आशंका जताई कि राज्य सरकार दिसंबर तक वित्तीय संकट में घिर सकती है और स्थिति ऐसी हो सकती है कि सरकारी कर्मचारियों को वेतन तक देना मुश्किल हो जाए।

