राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने भरतपुर रेलवे स्टेशन पर राज्य सरकार और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर निशाना साधा। जयपुर से आगरा जाते हुए ट्रेन यात्रा के दौरान रविवार को भरतपुर स्टेशन पर पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में गहलोत ने राज्य की कानून-व्यवस्था और जन समस्याओं को लेकर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया।
भरतपुर के निवासी भजनलाल शर्मा के मुख्यमंत्री बनने को लेकर चुटकी लेते हुए गहलोत ने कहा, “इस बार भरतपुर के लोगों को अच्छे से अहसास हो रहा होगा कि उनके घर का सदस्य मुख्यमंत्री बन गया है। अब देखना है कि काम कितना होता है। मुख्यमंत्री को चाहिए कि वे अच्छा काम करके भरतपुर का नाम पूरे प्रदेश में रोशन करें।”
“राज्य में डर का माहौल, सरकार चुप”
गहलोत ने प्रदेश में बढ़ते अपराधों को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बच्चियों से दुष्कर्म, अपहरण और हत्या जैसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और आम लोग भय के साये में जी रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “लोगों की उम्मीदें मुख्यमंत्री से जुड़ी हैं, ऐसे में उन्हें चाहिए कि इन घटनाओं को गंभीरता से लें। मगर सरकार चुप है और जन सरोकारों से भटक चुकी है। उन्हें अपनी प्राथमिकताएं बदलनी होंगी।”
उन्होंने बिजली कटौती को लेकर भी सरकार की आलोचना की और कहा कि इससे आमजन की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। गहलोत के मुताबिक, सरकार को दिखावे की राजनीति छोड़कर बुनियादी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
“प्रशासन शहरों के संग अभियान फिर शुरू हो”
गहलोत ने अपने कार्यकाल के दौरान चलाए गए ‘प्रशासन शहरों के संग’ अभियान को दोबारा शुरू करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि इस पहल के ज़रिए लोगों को ज़मीन से जुड़े दस्तावेज, पट्टे और नामांतरण जैसी नागरिक सेवाएं सरलता से मिलती थीं। वर्तमान में ज़िले के कई हिस्सों में लोग इन सेवाओं को लेकर परेशान हैं।
गहलोत ने कहा, “लोगों के ज़मीनी दस्तावेज लंबित पड़े हैं, उन्हें पट्टे नहीं मिल रहे। सरकार को तत्काल ऐसे अभियान शुरू करने चाहिए।”
दौरे को कांग्रेस की सक्रियता का संकेत माना जा रहा
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के इस दौरे को कांग्रेस की राजनीतिक सक्रियता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। भरतपुर और दौसा स्टेशनों पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गहलोत का यह सफर आगामी समय में जन मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार को घेरने की कांग्रेस रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

