झारखंड छात्र आंदोलन:सरकार से बातचीत को तैयार छात्र,11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल करेगा वार्ता;10 अगस्त को विधानसभा घेराव की चेतावनी

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रिपोर्ट:-हर्षित नागदा

रांची, 6 अगस्त: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जारी छात्र आंदोलन अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। राज्य सरकार ने आंदोलनकारी छात्रों को बातचीत का प्रस्ताव दिया है, जिसे छात्रों ने सशर्त स्वीकार कर लिया है। अब 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सरकार से वार्ता करेगा। हालांकि छात्रों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं हुआ तो 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव किया जाएगा।

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में कई दिनों से चल रहे धरना-प्रदर्शन के बीच छात्र नेताओं ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र, दो पत्रकार और एक वकील शामिल होंगे। उनका कहना है कि बातचीत के दौरान केवल छात्र प्रतिनिधि ही अपनी मांगें रखेंगे। आंदोलनकारियों ने यह भी मांग की है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं बातचीत में शामिल हों।

सरकार की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वार्ता के लिए चार मंत्रियों की समिति बनाई है। इसमें उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, कल्याण मंत्री चमरा लिंडा और उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव शामिल हैं। राज्य सरकार का कहना है कि वह छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुनने और समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस बीच आंदोलन स्थल पर छात्र नेताओं का अनशन जारी है। देवेंद्र नाथ महतो समेत छह छात्र भूख हड़ताल पर हैं। महतो ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अपील पर पानी पी लिया, लेकिन उन्होंने कहा कि सरकार की मांगें पूरी होने तक उनका अनशन जारी रहेगा।

दूसरी ओर, जांच एजेंसियों की कार्रवाई भी तेज हुई है। सीआईडी ने परीक्षा संचालन से जुड़ी आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल (TSR Data Processing Pvt. Ltd.) से जुड़े पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक कुल 19 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। छात्र संगठन टीडीपीएल के जरिए कराई गई परीक्षाओं को रद्द करने, सीबीआई और ईडी से जांच कराने तथा भर्ती प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।

आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कांग्रेस छात्रों के साथ खड़ी है और चाहे सहयोगी दल की सरकार हो या विपक्ष की, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं भाजपा ने भी झारखंड विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करते हुए सरकार पर भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया और छात्रों की मांगों का समर्थन किया।

इधर, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) ने रांची में रैली निकालकर भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग की। संगठनों ने वर्ष 2001 से अब तक हुई भर्ती परीक्षाओं की स्वतंत्र जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।

क्या है पूरा विवाद?

विवाद की शुरुआत 2 जुलाई को 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद हुई। अभ्यर्थियों ने कट-ऑफ जारी नहीं करने, कथित ओएमआर शीट विवाद और चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए। बढ़ते विवाद के बाद आयोग ने मुख्य परीक्षा स्थगित कर दी। इसके बाद आंदोलन धीरे-धीरे राज्यव्यापी छात्र आंदोलन में बदल गया।

छात्रों की प्रमुख मांगें

  • 14वीं JPSC और JSSC-CGL समेत विवादित भर्ती परीक्षाएं रद्द की जाएं।
  • पूरे मामले की CBI और ED से स्वतंत्र जांच कराई जाए।
  • टीडीपीएल से कराई गई सभी परीक्षाएं निरस्त कर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया जाए।
  • भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संरचनात्मक सुधार किए जाएं।
  • दोषी अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

अब सभी की निगाहें सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी हैं। यदि वार्ता से समाधान नहीं निकलता, तो 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव आंदोलन को और व्यापक राजनीतिक और सामाजिक स्वरूप दे सकता है।