लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। उन्होंने बताया कि उन्हें रविशंकर प्रसाद और विपक्ष के नेता समेत 146 सांसदों के हस्ताक्षर वाला प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, जिसमें जज को पद से हटाने की मांग की गई है।
स्पीकर ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनिंदर मोहन श्रीवास्तव और वरिष्ठ अधिवक्ता बीवी आचार्य शामिल हैं। समिति की रिपोर्ट आने तक प्रस्ताव लंबित रहेगा।
यह कार्रवाई 14 मार्च को सामने आए एक वीडियो के बाद शुरू हुई थी, जिसमें जस्टिस वर्मा के घर से अधजली 500-500 रुपये की गड्डियां मिलने का दावा किया गया था। स्पीकर बिरला ने कहा कि इस मामले के तथ्य भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हैं और न्यायपालिका में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए कार्रवाई जरूरी है।
भारत में अब तक किसी भी जज को महाभियोग के जरिए पद से नहीं हटाया गया है, हालांकि स्वतंत्रता के बाद से छह बार ऐसे प्रस्ताव लाए जा चुके हैं। इनमें जस्टिस वी. रामास्वामी (1993) और जस्टिस सौमित्र सेन (2011) के मामले सबसे चर्चित रहे, लेकिन दोनों ही मामलों में जज को हटाया नहीं जा सका।

