कारगिल विजय दिवस पर सेना प्रमुख ने कहा— ऑपरेशन सिंदूर,आतंक के खिलाफ सर्जिकल जवाब था

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भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शनिवार को लद्दाख के द्रास में कारगिल विजय दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत की गई सर्जिकल स्ट्राइक पाकिस्तान को यह सीधा संदेश था कि आतंकवाद और उसके समर्थकों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई पहलगाम आतंकी हमले का जवाब भी थी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

जनरल द्विवेदी ने कहा कि अब भारत सिर्फ शोक नहीं मनाता, बल्कि दुश्मन को जवाब भी देता है। उन्होंने दो टूक कहा— “दुश्मन को जवाब देना अब न्यू नॉर्मल है।”

इस मौके पर दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी नेशनल वॉर मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उनके साथ थलसेना, वायुसेना और नौसेना प्रमुख भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया पर वीर सपूतों की शहादत को नमन करते हुए लिखा— “यह दिन भारत के वीरों की वीरता और समर्पण की याद दिलाता है।”

1999 की कारगिल जंग: एक ऐतिहासिक संघर्ष

5 मई 1999 को पाकिस्तान के सैनिकों और घुसपैठियों ने कारगिल सेक्टर की ऊंची पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया था। शुरुआत में यह आतंकियों की घुसपैठ लग रही थी, लेकिन जल्द ही पता चला कि इस ऑपरेशन में पाकिस्तानी सेना सीधे तौर पर शामिल थी। इसके बाद भारत ने “ऑपरेशन विजय” शुरू किया।

भारतीय सेना को दुश्मन की पोजिशन तक पहुंचने के लिए बेहद कठिन पर्वतीय रास्तों से गुजरना पड़ा। शुरुआत में भारी नुकसान के बाद भारत ने वायुसेना और नौसेना को भी मोर्चे पर उतारा। मिग-29 और मिराज-2000 विमानों से बमबारी की गई, जबकि नौसेना ने ऑपरेशन तलवार के तहत पाकिस्तान के समुद्री रास्तों को बंद कर दिया।

युद्ध के निर्णायक क्षण तब आए जब भारत ने बोफोर्स तोपों से दुश्मन के ठिकानों को ध्वस्त किया। करीब दो महीने तक चले इस संघर्ष में भारत के 527 जवान शहीद हुए। पाकिस्तान के करीब 3,000 सैनिकों की मौत हुई, हालांकि पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर सिर्फ 357 मौतों की पुष्टि करता है।

जो रूट की श्रद्धांजलि और नए रिकॉर्ड

इस वर्ष कारगिल युद्ध की 26वीं वर्षगांठ पर आयोजन विशेष रूप से भावनात्मक और संदेशपूर्ण रहा। भारत ने स्पष्ट किया कि वह शांति चाहता है, लेकिन सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।

कारगिल विजय दिवस हर साल 26 जुलाई को मनाया जाता है, जब भारतीय सेना ने 1999 में कारगिल की चोटियों पर दोबारा कब्जा कर विजय हासिल की थी। यह दिन न केवल शहीदों को याद करने का अवसर है, बल्कि देश के संकल्प और साहस की मिसाल भी है।