नई दिल्ली। सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को रोकने के लिए लाए गए ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर संसद में मंगलवार को चर्चा होने की संभावना है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल के बाद सरकार और विपक्ष के बीच इस पर चर्चा कराने को लेकर सहमति बनने की बात सामने आई है।
यह विधेयक सोमवार को लोकसभा में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पेश किया था, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण इस पर चर्चा नहीं हो सकी। विपक्ष ने नीट-यूजी पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और कथित लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग की, जिसके चलते लोकसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
सरकार की ओर से कहा गया है कि यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के मामलों में सजा और जुर्माने को पहले से अधिक कठोर बनाने का प्रावधान किया गया है।
विधेयक के अनुसार, पेपर लीक और अन्य परीक्षा अपराधों में दोषी पाए जाने वालों के लिए न्यूनतम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की सजा का प्रावधान होगा। अधिकतम जुर्माना ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख किया जाएगा। संगठित परीक्षा अपराधों में जुर्माना ₹10 करोड़ तक हो सकेगा, जबकि परीक्षा से जुड़े सेवा प्रदाताओं पर भी अधिक कड़ी कार्रवाई का प्रस्ताव है।
प्रस्तावित कानून में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन, दो महीने के भीतर जांच पूरी करने, तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करने और विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का भी प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार को ऐसे मामलों की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने का अधिकार भी मिलेगा।
यह संशोधन विधेयक 2024 में बने सार्वजनिक परीक्षा कानून में बदलाव के लिए लाया गया है। सरकार ने इसे नीट-यूजी पेपर लीक विवाद और देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बाद तैयार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही परीक्षा प्रणाली में सुधार, सख्त कानूनी प्रावधान और नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय परीक्षा सुधार टास्क फोर्स के गठन की घोषणा कर चुके हैं।
इस बीच, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफे के बाद पहली बार सोमवार को संसद पहुंचे। संसद परिसर में एनडीए सांसदों ने उनका स्वागत किया। धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को नीट-यूजी विवाद के बीच शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।
सरकार का कहना है कि यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम है, जबकि विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह चर्चा के दौरान विधेयक के साथ-साथ छात्रों से जुड़े अन्य मुद्दों को भी उठाएगा।

