राजस्थान में सब इंस्पेक्टर (SI) भर्ती-2021 को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान शुक्रवार को हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से बहस पूरी हो गई। जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ में याचिकाकर्ताओं के वकील हरेन्द्र नील ने दलील दी कि यह भर्ती पूरी तरह से रद्द किए जाने की शर्तों को पूरा करती है।
“कोर्ट से की गई है भर्ती रद्द करने की मांग, न कि सरकार से”
वकील नील ने अपने तर्कों में कहा कि उनकी याचिका आज भी न्यायिक रूप से वैध है और इसमें भर्ती रद्द करने की अपील सरकार से नहीं, बल्कि सीधे अदालत से की गई है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अदालत याचिका में मांगी गई राहत से आगे बढ़कर भी फैसला देने के लिए स्वतंत्र है।
सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
वकील ने सरकार और चयनित अभ्यर्थियों की ओर से पेश दलीलों का जवाब देते हुए कहा कि फरवरी में बहस पूरी होने के बाद सरकार ने खुद अदालत में कहा था कि वह भर्ती पर निर्णय लेना चाहती है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की ओर से भर्ती रद्द करने की सिफारिश सरकार के निर्देश पर की गई थी। “22 मार्च 2024 को गृह विभाग ने SOG को पत्र भेजा था, जिसमें भर्ती रद्द करने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया था,” नील ने बताया।
“पेपर लीक से जुड़े आरोपी भर्ती में शामिल थे”
वकील हरेन्द्र नील ने कोर्ट को बताया कि यह इकलौती ऐसी भर्ती है, जिसमें पेपर लीक से जुड़े अधिकांश आरोपी एक ही भर्ती प्रक्रिया में शामिल थे। उन्होंने दावा किया कि अब तक 53 ट्रेनी सब इंस्पेक्टर गिरफ्तार हो चुके हैं और कई अन्य अभी जांच के दायरे में हैं।
इसके अलावा, राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के सदस्यों और उनके बच्चों की गिरफ्तारी का भी उल्लेख किया गया।
“अगर भर्ती रद्द नहीं हुई तो व्यवस्था पर उठेंगे सवाल”
वकील का तर्क था कि यदि इस भर्ती को रद्द नहीं किया गया तो उन उम्मीदवारों को कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी दी जाएगी, जो खुद पेपर लीक घोटाले में शामिल रहे हैं। “इस स्थिति से बचने का एकमात्र रास्ता भर्ती को रद्द करना है,” उन्होंने कहा।
अगले हफ्ते पूरी हो सकती है सुनवाई
हाईकोर्ट ने इस मामले की फाइनल सुनवाई 7 जुलाई से शुरू की थी। अब सोमवार को सरकार और चयनित अभ्यर्थियों की ओर से याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर जवाब पेश किया जाएगा। अदालत से उम्मीद की जा रही है कि वह अगले सप्ताह तक इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई पूरी कर सकती है।

