भारत ने रूस से तेल खरीद बंद करने की खबरों को किया खारिज,कहा- फैसले अपने हित में लेते हैं

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भारतीय विदेश मंत्रालय ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि भारत ने अमेरिकी दबाव में आकर रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि भारत अपने निर्णय वैश्विक परिस्थितियों और घरेलू जरूरतों के हिसाब से लेता है, किसी बाहरी दबाव में नहीं।

“भारत अपनी ज़रूरत और बाज़ार की स्थितियों को देखकर फैसले लेता है”

प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जायसवाल ने स्पष्ट किया, “बाज़ार में जो उपलब्ध है और दुनिया में जो हालात हैं, भारत उसी के अनुसार निर्णय करता है।” उनका यह बयान उन रिपोर्ट्स के बाद आया है, जिनमें कहा गया था कि भारत की सरकारी रिफाइनरियों ने हाल ही में रूसी कच्चे तेल की खरीद बंद कर दी है, क्योंकि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को इस पर चेतावनी दी थी।

पाकिस्तान से तेल खरीद पर टिप्पणी से इनकार

प्रवक्ता से जब ट्रम्प के उस बयान पर सवाल किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत भविष्य में पाकिस्तान से भी तेल खरीद सकता है, तो उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों की समीक्षा कर रही भारत सरकार

ईरान के साथ व्यापार को लेकर पूछे गए सवाल पर जायसवाल ने बताया कि भारत सरकार उन कंपनियों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों की समीक्षा कर रही है, जो ईरान के साथ व्यापार में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है।

भारत-अमेरिका के बीच मजबूत रक्षा संबंध

रणधीर जायसवाल ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी मजबूत बनी हुई है और भारत की रक्षा नीति पूरी तरह उसकी रणनीतिक जरूरतों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर आधारित है। यह बयान उस वक्त आया है जब हाल ही में सरकार ने संसद में बताया कि भारत ने अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर अभी तक कोई औपचारिक चर्चा नहीं की है।

“अमेरिकी दबाव में न आए भारत” – GTRI

इस बीच, ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) नामक थिंक टैंक ने भी भारत को सलाह दी है कि वह रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी दबाव में न आए। GTRI का मानना है कि रूस से सस्ता तेल आयात कर भारत ने महंगाई को नियंत्रित रखने और वैश्विक अस्थिरता के बीच आर्थिक संतुलन बनाए रखने में सफलता पाई है।

भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेता है और बाहरी दबाव से उसकी नीति प्रभावित नहीं होती।