नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को राजधानी के भारत मंडपम में आयोजित एमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC) 2025 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने देश और विदेश से आए वैज्ञानिकों, नवोन्मेषकों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं का स्वागत करते हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
प्रधानमंत्री ने इस मौके पर ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) स्कीम फंड का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह योजना निजी क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। “हम ‘Ease of Doing Research’ पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि भारत में नवाचार का एक आधुनिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो सके,” प्रधानमंत्री ने कहा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि “जब विज्ञान को विस्तार मिलता है, नवाचार समावेशी बनता है और तकनीक परिवर्तन की दिशा तय करती है, तभी महान उपलब्धियों की नींव रखी जाती है।”
प्रधानमंत्री ने भारत की हालिया सफलताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि “भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि तकनीक के माध्यम से परिवर्तन का अग्रदूत बन चुका है।” उन्होंने बताया कि पिछले दशक में भारत का आर एंड डी खर्च दोगुना हुआ है, पेटेंट पंजीकरण 17 गुना बढ़े हैं और भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है।
उन्होंने बताया कि भारत में 6,000 से अधिक डीप-टेक स्टार्टअप्स स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत सामग्री जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जबकि देश की बायो-इकोनॉमी 2014 के 10 अरब डॉलर से बढ़कर अब 140 अरब डॉलर तक पहुंच गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में ग्रीन हाइड्रोजन, क्वांटम कंप्यूटिंग, डीप सी रिसर्च और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने दुनिया में सफलता की नई मिसाल कायम की है, जिससे गांव-गांव तक ऑप्टिकल फाइबर और सस्ती मोबाइल डेटा सेवाएं पहुंची हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने महिला विश्व कप 2025 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक जीत पर भी देशवासियों को बधाई दी और कहा कि यह उपलब्धि देश की युवतियों और युवाओं को नई प्रेरणा देगी।
उन्होंने ISRO द्वारा देश के सबसे भारी संचार उपग्रह के सफल प्रक्षेपण पर वैज्ञानिकों को भी बधाई दी और कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब चंद्रमा और मंगल से आगे बढ़कर किसानों और मछुआरों के जीवन में सुधार ला रहा है।
महिलाओं की भागीदारी पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में अब हर साल 5,000 से अधिक पेटेंट महिलाओं द्वारा दाखिल किए जा रहे हैं, जबकि एक दशक पहले यह संख्या 100 से भी कम थी। उन्होंने बताया कि आज भारत में STEM शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी 43 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो वैश्विक औसत से अधिक है।
युवा पीढ़ी में विज्ञान के प्रति बढ़ती जिज्ञासा का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देशभर में अब तक 10,000 अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित की गई हैं, जिनमें एक करोड़ से अधिक बच्चे नवाचार के प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले समय में 25,000 नई अटल टिंकरिंग लैब्स खोली जाएंगी।
उन्होंने यह भी बताया कि अगले पांच वर्षों में 10,000 प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप्स दी जाएंगी ताकि युवा शोधकर्ताओं को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके।
प्रधानमंत्री ने कहा कि “भारत नैतिक और मानव-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के वैश्विक ढांचे को आकार दे रहा है।” उन्होंने बताया कि सरकार ‘इंडिया AI मिशन’ के तहत ₹10,000 करोड़ का निवेश कर रही है और फरवरी 2026 में भारत ग्लोबल AI समिट की मेजबानी करेगा।
उन्होंने कहा कि भारत को अब खाद्य सुरक्षा से आगे बढ़कर पोषण सुरक्षा, बायोफोर्टिफाइड फसलों, मिट्टी के स्वास्थ्य संवर्धन, और सस्ती ऊर्जा भंडारण तकनीकों की दिशा में नवाचार पर ध्यान देना चाहिए।
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद और नोबेल पुरस्कार विजेता सर आंद्रे गीम सहित अनेक वैज्ञानिक और नीति-निर्माता उपस्थित रहे।
पृष्ठभूमि:
एमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC) 2025 तीन दिवसीय आयोजन है, जो 3–5 नवंबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहा है। इसमें देश-विदेश के 3,000 से अधिक प्रतिनिधि, नोबेल पुरस्कार विजेता, वैज्ञानिक, उद्योगपति और नवोन्मेषक शामिल हैं। कॉन्क्लेव में 11 प्रमुख विषयों पर चर्चा हो रही है, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस टेक्नोलॉजी, एनर्जी, हेल्थ, बायो-मैन्युफैक्चरिंग और क्वांटम साइंस जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं।

