प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को फ्रांस और स्लोवाकिया की बहुस्तरीय यात्रा पर रवाना हुए। इस दौरे के दौरान वह फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा पर जाएंगे। स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा होगी।
फ्रांस के पहले चरण के दौरे में प्रधानमंत्री मोदी नीस में राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता भारत-फ्रांस संबंधों की समीक्षा करेंगे, जिन्हें हाल ही में ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा दिया गया है। इस दौरान दोनों नेता संयुक्त रूप से ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन भी करेंगे, जिसमें भारत, फ्रांस और अन्य देशों के स्टार्टअप्स तथा निवेशक भाग लेंगे।
इसके बाद प्रधानमंत्री स्लोवाकिया पहुंचेंगे, जहां उनकी राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऑटोमोबाइल और रेलवे विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होने की संभावना है।
दौरे के तीसरे चरण में प्रधानमंत्री 16 और 17 जून को फ्रांस के एवियां में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। सम्मेलन में वैश्विक आर्थिक विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और भू-राजनीतिक चुनौतियों जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि जी-7 में भारत की लगातार आठवीं आमंत्रित भागीदारी देश की बढ़ती वैश्विक भूमिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भरोसे को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि भारत केवल अपने हितों की नहीं, बल्कि ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों की आकांक्षाओं की भी आवाज़ उठाएगा। प्रधानमंत्री के अनुसार, दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के सामने चुनौतियां हैं, लेकिन भारत की विकास यात्रा वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रही है।
दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री पेरिस में यूरोप के प्रमुख प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप सम्मेलन ‘वीवाटेक 2026’ में हिस्सा लेंगे। इस आयोजन में भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय मंडप स्थापित किया जाएगा। प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह यात्रा फ्रांस, स्लोवाकिया, यूरोपीय संघ और जी-7 देशों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूत करने का अवसर होगी। उनके अनुसार, नवाचार, प्रौद्योगिकी, निवेश और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में यह दौरा नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

