RSS शताब्दी समारोह में बोले PM मोदी:“घुसपैठियों से सबसे बड़ी चुनौती,संघ राष्ट्र निर्माण का पुण्य अवतार”

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह में संबोधित करते हुए कहा कि संघ के स्वयंसेवकों ने हमेशा राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ कार्य किया और कभी कटुता नहीं दिखाई, चाहे प्रतिबंध लगे हों या साजिश रची गई हो।

समारोह में प्रधानमंत्री ने RSS के योगदान को दर्शाने वाला स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया। उन्होंने कहा, “संघ के स्वयंसेवक लगातार देश सेवा और समाज को सशक्त करने में लगे हुए हैं। इसकी झलक इस डाक टिकट और सिक्के में भी दिखाई देती है।”

PM मोदी के भाषण की तीन अहम बातें

  1. 100 साल पहले RSS की स्थापना संयोग नहीं थी
    प्रधानमंत्री ने कहा कि RSS की स्थापना अन्याय पर न्याय और अंधकार पर प्रकाश की जीत का उद्घोष थी। उन्होंने इसे हजारों साल की परंपरा का पुनरुत्थान बताते हुए कहा कि संघ “अनादि राष्ट्र चेतना का पुण्य अवतार” है।
  2. संघ का उद्देश्य केवल राष्ट्र प्रथम
    मोदी ने कहा कि संघ की विभिन्न धाराओं में कभी विरोधाभास नहीं रहा क्योंकि सबका मंत्र एक ही रहा—राष्ट्र प्रथम। उन्होंने शाखा की पद्धति को “व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण” का मार्ग बताया।
  3. घुसपैठियों से बड़ी चुनौती
    प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि आज भारत को घुसपैठ, जनसंख्या संतुलन बदलने की साजिश और आर्थिक निर्भरता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि संघ ने इससे निपटने के लिए ठोस रोडमैप तैयार किया है।

RSS अपना शताब्दी वर्ष कार्यक्रम इस दशहरे से शुरू करेगा। 2 अक्टूबर 2025 से 20 अक्टूबर 2026 तक देशभर में सात बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संघ प्रमुख मोहन भागवत भी इस दौरान अमेरिका और यूरोप के कई आयोजनों में हिस्सा ले सकते हैं।