गुजरात के डेड़ियापाड़ा में जंजातीय गौरव दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने करीब ₹9,700 करोड़ की विभिन्न विकास और अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि “आदिवासी समाज भारत की चेतना का अभिन्न हिस्सा है। देश की आज़ादी से लेकर उसकी अस्मिता की रक्षा तक, जनजातीय समुदाय हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़ा रहा”। उन्होंने आज़ादी के आंदोलन में आदिवासी नायकों के योगदान को याद करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों को यह इतिहास बताना जरूरी है।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने ‘श्री गोविंद गुरु चेयर – ट्राइबल लैंग्वेज प्रमोशन सेंटर’ का उद्घाटन भी किया, जहां भील, गामित, वसावा, गरासिया, सांतल, वारली समेत कई जनजातीय बोलियों पर शोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी भाषाओं, गीतों और कहानियों का संरक्षण देश की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध करेगा।
मोदी ने कहा कि सिकल सेल बीमारी लंबे समय से आदिवासी समुदायों के लिए गंभीर चुनौती रही है, और इसे रोकने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि देशभर में इसके लिए एक राष्ट्रीय अभियान चल रहा है, जिसके तहत अब तक करोड़ों लोगों की जांच हो चुकी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार आदिवासी विकास को शीर्ष प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि “पूर्ववर्ती सरकारों ने छह दशक तक आदिवासी क्षेत्रों को उनके हाल पर छोड़ दिया था”, जबकि मौजूदा सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं पर तेज़ी से काम किया है।
उन्होंने बताया कि गुजरात के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में पिछले दो दशकों में स्कूलों और कॉलेजों की संख्या में बड़ा विस्तार हुआ है। देशभर में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों पर भी सरकार ने ₹18,000 करोड़ से अधिक खर्च किए हैं, जिससे जनजातीय बच्चों की शिक्षा में 60% की बढ़ोतरी हुई है।
मोदी ने कहा कि खेलों में भी आदिवासी युवाओं की प्रतिभा उभर रही है और सरकार जनजातीय क्षेत्रों में खेल सुविधाओं को बढ़ा रही है।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने PM-JANMAN, डेढ़ियापाड़ा और अन्य आदिवासी क्षेत्रों में 1 लाख से अधिक घरों के गृह प्रवेश, 42 एकलव्य मॉडल स्कूल, 228 मल्टी-पर्पज़ सेंटर, 748 किमी नई सड़कों, और 250 नई बसों समेत कई प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की।
उन्होंने कहा कि “सबका साथ, सबका विकास” का मंत्र ही जनजातीय समाज के लिए सच्ची श्रद्धांजलि है और देश को विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचाने में आदिवासी समाज की भूमिका निर्णायक होगी।
कार्यक्रम में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी मौजूद रहे।

