भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों को नई दिशा:पीएम नरेंद्र मोदी और चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर की वार्ता,शांति,व्यापार और आतंकवाद पर जोर

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नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में वैश्विक शांति, व्यापार, तकनीक और आतंकवाद से मुकाबले जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। यह यात्रा चार दशकों में किसी ऑस्ट्रियाई चांसलर की पहली भारत यात्रा मानी जा रही है।

संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया इस समय गंभीर और तनावपूर्ण दौर से गुजर रही है, और यूक्रेन व पश्चिम एशिया जैसे क्षेत्रों में जारी संघर्षों का समाधान सैन्य टकराव से संभव नहीं है। उन्होंने “स्थायी, टिकाऊ और दीर्घकालिक शांति” की वकालत करते हुए वैश्विक संस्थाओं में सुधार और आतंकवाद के खात्मे को साझा प्राथमिकता बताया।

चांसलर स्टॉकर ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को “बेहद महत्वपूर्ण” बताते हुए कहा कि इससे दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रिया के करीब 160 कंपनियां भारत में सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, ऑटोमोबाइल और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं।

इस दौरान भारत और ऑस्ट्रिया के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी, व्यापार, कौशल विकास और नवाचार सहित विभिन्न क्षेत्रों में कुल 15 समझौते और पहलें सामने आईं। दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group on Counter Terrorism) बनाने पर सहमति जताई।

वार्ता में रक्षा सहयोग, साइबर सुरक्षा, स्टार्टअप, क्वांटम तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और शिक्षा के क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। साथ ही, निवेश को बढ़ावा देने के लिए फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म और कौशल विकास के लिए नए कार्यक्रमों की घोषणा की गई।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की “स्पीड और स्केल” तथा ऑस्ट्रिया की “इनोवेशन और विशेषज्ञता” मिलकर वैश्विक स्तर पर मजबूत सप्लाई चेन और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ा सकती है। वहीं, चांसलर स्टॉकर ने भारत को “दुनिया की सबसे गतिशील अर्थव्यवस्थाओं में से एक” बताते हुए इसे एक अहम रणनीतिक साझेदार बताया।

दोनों देशों ने आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके खिलाफ समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। नेताओं ने यह भी कहा कि उभरती तकनीकों का दुरुपयोग रोकने और आतंक के वित्तपोषण पर लगाम लगाने के लिए सहयोग बढ़ाया जाएगा।

इस यात्रा को भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें आर्थिक, सामरिक और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।