प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले —‘जब न्याय सभी के लिए सुलभ और समय पर मिले,तभी बनता है सामाजिक न्याय का आधार’राष्ट्रीय सम्मेलन में बोले पीएम मोदी,‘Ease of Justice’ के बिना ‘Ease of Living’ अधूरा;लॉन्च किया कम्युनिटी मेडिएशन ट्रेनिंग मॉड्यूल

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नई दिल्ली, 8 नवंबर 2025 |
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को “सशक्त कानूनी सहायता तंत्र” पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि “जब न्याय सभी के लिए सुलभ हो, समय पर मिले और हर व्यक्ति तक पहुंचे — चाहे उसका सामाजिक या आर्थिक स्तर कुछ भी हो — तभी वह वास्तविक सामाजिक न्याय बनता है।”

यह सम्मेलन भारत के सर्वोच्च न्यायालय में आयोजित किया गया, जहां प्रधानमंत्री ने कम्युनिटी मेडिएशन ट्रेनिंग मॉड्यूल की शुरुआत की। इस मौके पर मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई, केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और NALSA (राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण) के वरिष्ठ सदस्य मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कानूनी सहायता प्रणाली आम लोगों और न्यायपालिका के बीच पुल का काम करती है। उन्होंने बताया कि “लोक अदालतों और प्री-लिटिगेशन सुलह” के जरिये लाखों विवाद तेज़ी से और कम खर्च में निपटाए जा रहे हैं। “कानूनी सहायता रक्षा वकील प्रणाली” के तहत सिर्फ तीन वर्षों में करीब 8 लाख आपराधिक मामलों का समाधान हुआ है, जिससे गरीबों और वंचितों के लिए Ease of Justice सुनिश्चित हुआ है।

मोदी ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में सरकार ने Ease of Doing Business और Ease of Living पर व्यापक सुधार किए हैं — 40,000 से अधिक अनुपालन समाप्त, 3,400 से ज़्यादा कानूनी प्रावधानों का डिक्रिमिनलाइजेशन और 1,500 अप्रासंगिक कानूनों का निरसन। उन्होंने कहा, “Ease of Doing Business और Ease of Living तभी संभव है जब Ease of Justice सुनिश्चित हो। आने वाले समय में हम इस दिशा में और तेजी से काम करेंगे।”

प्रधानमंत्री ने NALSA के 30 वर्ष पूरे होने पर संस्था की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह संगठन “न्यायपालिका और समाज के अंतिम व्यक्ति” के बीच एक सेतु के रूप में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिनके पास संसाधन, प्रतिनिधित्व या उम्मीद नहीं होती, उन्हें न्याय की आस देना ही सेवा का सच्चा अर्थ है।

मोदी ने कहा कि “मेडिएशन” भारतीय सभ्यता का अभिन्न हिस्सा रहा है — ग्राम पंचायतों और गांव के बुजुर्गों के माध्यम से संवाद से समाधान की परंपरा आज भी जीवित है। उन्होंने कहा कि नया मेडिएशन एक्ट इस परंपरा को आधुनिक रूप देता है और नया प्रशिक्षण मॉड्यूल देशभर में सामुदायिक सुलह को मजबूत करेगा, जिससे विवाद कम होंगे और सामाजिक सौहार्द बढ़ेगा।

प्रधानमंत्री ने प्रौद्योगिकी को “समावेशन और सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम” बताते हुए eCourts परियोजना की सराहना की। उन्होंने कहा कि “ई-फाइलिंग, ई-सम्मन, वर्चुअल हियरिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ने न्याय तक पहुंच को सरल बनाया है।” उन्होंने बताया कि eCourts प्रोजेक्ट के तीसरे चरण के लिए ₹7,000 करोड़ से अधिक का बजट आवंटित किया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि “कानून को समझने और अपनाने के लिए भाषा बेहद अहम है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि जब लोग अपनी भाषा में कानून समझते हैं, तो पालन बेहतर होता है और मुकदमेबाजी घटती है। मोदी ने सुप्रीम कोर्ट की 80,000 से अधिक निर्णयों को 18 भारतीय भाषाओं में अनुवादित करने की पहल की सराहना की और कहा कि यह प्रयास उच्च न्यायालयों और जिला अदालतों तक भी जारी रहना चाहिए।

उन्होंने युवाओं, खासकर कानून के छात्रों से अपील की कि वे गांवों और कमजोर तबकों तक न्यायिक जानकारी पहुंचाने में योगदान दें। “जब युवा गरीबों और ग्रामीणों से सीधे जुड़कर उनके अधिकारों को समझाते हैं, तब वे समाज की नब्ज़ पहचानते हैं,” उन्होंने कहा।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि “एक विकसित भारत तभी संभव है जब न्याय की डिलीवरी भी विकसित और सुलभ हो।” उन्होंने कहा कि “Ease of Justice” को राष्ट्रीय मिशन के रूप में अपनाना होगा, ताकि हर नागरिक को न्याय में समान अवसर और विश्वास मिल सके।