राजस्थान में कफ सिरप से बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल,CAG रिपोर्ट में उजागर हुई बड़ी खामियां

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जयपुर, 11 अक्टूबर — राजस्थान में कथित रूप से कफ सिरप पीने से चार बच्चों की मौत के बाद राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। इस बीच भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में गंभीर कमियों का खुलासा किया है।

‘पब्लिक हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड मैनेजमेंट इन राजस्थान’ शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016 से 2022 के बीच ड्रग कंट्रोल अधिकारियों को कुल 94,800 निरीक्षण करने थे, लेकिन उनमें से केवल 65,135 निरीक्षण ही किए गए। यानी लगभग 31 प्रतिशत निरीक्षण (29,665) अब तक नहीं हुए। वर्ष 2021-22 में भी 21,840 निरीक्षणों के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 16,748 निरीक्षण ही पूरे किए गए। नियमानुसार, हर ड्रग कंट्रोल अधिकारी को हर महीने 20 निरीक्षण करने होते हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राज्य में प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिक्स की भारी कमी है। आंकड़ों के अनुसार, डॉक्टरों के 35.5%, नर्सों के 18.5% और पैरामेडिक्स के 55.8% पद खाली हैं। जयपुर में यह स्थिति सबसे खराब है, जहां 65.61% पद रिक्त हैं। इसके अलावा बारां (49.11%), जालोर (43.12%), पाली (40.53%) और राजसमंद (39.50%) जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में पद खाली हैं।

कैग की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा, “हम लगातार स्वास्थ्य क्षेत्र में कमियों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। राज्य में अब तक किसी भी सरकार ने इतनी भर्ती नहीं की। हमारी सरकार लगभग 50 हजार नए पदों पर भर्ती कर रही है — जिनमें से 23 हजार नियुक्तियां पूरी हो चुकी हैं और 27 हजार और की जाएंगी।”

बच्चों की मौत और रिपोर्ट में सामने आईं खामियों के बाद राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली की निगरानी और दवा नियंत्रण तंत्र पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।