राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र 1 सितंबर से शुरू होगा। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने सत्र बुलाने की अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके बाद सचिवालय ने सभी विधायकों को औपचारिक सूचना भेजनी शुरू कर दी है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सत्र की तैयारियों की समीक्षा की और सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला किया है, ताकि सदन सुचारु रूप से चल सके।
सत्र 7 से 10 दिन तक चल सकता है, जिसका अंतिम फैसला कार्य सलाहकार समिति (BAC) की बैठक में होगा। छह महीने के भीतर सत्र बुलाना संवैधानिक आवश्यकता है, इसलिए यह बैठक सितंबर के अंत से पहले हो रही है।
इस सत्र में कई अहम विधेयकों पर चर्चा और पारित होने की संभावना है। खासतौर पर धर्मांतरण विरोधी बिल, जिसे फरवरी में पेश किया गया था लेकिन पारित नहीं हो सका था। इस बिल में जबरन धर्म परिवर्तन पर सख्त सजा और कड़े प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा राजस्थान कोचिंग सेंटर रेगुलेशन बिल पर प्रवर समिति की रिपोर्ट भी पेश हो सकती है, जिसे हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद जल्द पास किए जाने की संभावना है।
चार विधेयक अभी पारित होना बाकी हैं, जबकि तीन बिल प्रवर समिति के पास लंबित हैं—जिनमें राजस्थान भू राजस्व संशोधन विधेयक और राजस्थान भूजल प्राधिकरण विधेयक शामिल हैं।
विपक्षी कांग्रेस सरकार को कानून व्यवस्था, आपदा प्रबंधन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति समेत कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। झालावाड़ स्कूल हादसे पर भी विपक्ष आक्रामक रुख अपना सकता है, और शिक्षा मंत्री विपक्ष के निशाने पर रहेंगे।

