जयपुर, 4 सितंबर: राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने नगर निकाय चुनावों को लेकर बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अदालत के हस्तक्षेप के बाद नगर निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कराने के आदेश और चुनावी कैलेंडर जारी होना राज्य सरकार के लिए “दुर्भाग्यपूर्ण” स्थिति है।
जयपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में डोटासरा ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने करीब डेढ़ साल तक नगर निकायों में निर्वाचित बोर्डों की जगह प्रशासकों के ज़रिए कामकाज चलाया और इस दौरान “भ्रष्टाचार” हुआ।
कांग्रेस नेता ने कहा कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में देरी और परिसीमन की प्रक्रिया के कारण नगर निकाय चुनाव आगे खिसकाए गए। उन्होंने दावा किया कि परिसीमन में कई जगह वार्डों की संरचना इस तरह बदली गई कि मतदाताओं की संख्या में तीन गुना तक अंतर हो गया।
आरक्षण को लेकर भी उठाए सवाल
डोटासरा ने नगर निकायों में आरक्षण की लॉटरी की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। उनका आरोप है कि पहली बार नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका के लिए अलग-अलग लॉटरी निकालने के बजाय संयुक्त रूप से आरक्षण तय किया गया।
उन्होंने दावा किया कि राज्य के 10 नगर निगमों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए कोई आरक्षित सीट नहीं है, जबकि केवल एक सीट ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हुई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छोटी नगर निकायों में ओबीसी के लिए आरक्षण 21 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है।
जयपुर की बदहाल स्थिति का आरोप
डोटासरा ने जयपुर की सड़कों, ट्रैफिक, सफाई और कानून-व्यवस्था को लेकर भी बीजेपी पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि जयपुर में लंबे समय से बीजेपी का नगर निगम बोर्ड रहा है, लेकिन इसके बावजूद शहर की स्थिति खराब है। कांग्रेस नेता ने सड़कों पर गड्ढों, ट्रैफिक जाम, आवारा पशुओं और सफाई व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए नगर निगम और जयपुर विकास प्राधिकरण में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
सफाई कर्मचारियों की भर्ती के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के समय 24 हजार से अधिक पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था, लेकिन बीजेपी सरकार के करीब ढाई साल के कार्यकाल में भर्ती पूरी नहीं हुई।
डोटासरा ने हाल में निकाली गई भर्ती में कथित तौर पर कड़ी शर्तों का भी विरोध किया और दावा किया कि इसके कारण करीब चार हजार आवेदन ही प्राप्त हुए।
सरकार की योजनाओं पर भी सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बीजेपी की ओर से नगर निकाय चुनाव के लिए किए गए एक लाख प्लॉट देने के वादे पर सवाल उठाते हुए पूछा कि विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए इस वादे को अब तक पूरा क्यों नहीं किया गया।
उन्होंने सात लाख पीएनजी कनेक्शन देने की घोषणा को भी पिछली कांग्रेस सरकार के काम का विस्तार बताया। डोटासरा ने कहा कि शहरों में पीएनजी पहुंचाने की प्रक्रिया कांग्रेस सरकार के समय शुरू हो चुकी थी।
उन्होंने शहरों में स्ट्रीट लाइट, सफाई और कचरा प्रबंधन की स्थिति पर भी सवाल उठाए और सफाई से जुड़े टेंडरों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
नगर निकायों को मिलने वाली राशि का मुद्दा
डोटासरा ने सरकार पर नगर निकायों को मिलने वाली ग्रांट रोकने का भी आरोप लगाया। उन्होंने 15वें वित्त आयोग और अन्य मदों से मिलने वाली राशि के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि कई वर्षों में निर्धारित राशि की तुलना में कम धनराशि जारी की गई।
उन्होंने कहा कि सरकार ने न तो समय पर चुनाव कराए, न सफाई व्यवस्था में सुधार किया और न ही नगर निकायों को पूरी वित्तीय सहायता दी।
उम्मीदवारों पर दबाव बनाने का आरोप
कांग्रेस नेता ने चुनाव प्रक्रिया में प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव के भी आरोप लगाए। उन्होंने देशनोक, मालपुरा, डीग, पाली और नाथद्वारा समेत कई जगहों का ज़िक्र करते हुए दावा किया कि कांग्रेस उम्मीदवारों और संभावित उम्मीदवारों पर नामांकन वापस लेने या चुनाव नहीं लड़ने के लिए दबाव बनाया गया।डोटासरा ने इसे “सत्ता का दुरुपयोग” बताते हुए कहा कि कांग्रेस इन मामलों को चुनावी मुद्दा बनाएगी।
कांग्रेस ने जारी किया अपना एजेंडा
डोटासरा ने नगर निकाय चुनाव जीतने की स्थिति में कांग्रेस की ओर से किए जाने वाले कामों का भी ऐलान किया।
कांग्रेस के प्रमुख वादों में पट्टों का वितरण, यूडी टैक्स की समीक्षा, सफाई कर्मचारियों की भर्ती, घर-घर मुफ्त कचरा संग्रहण, सीवरेज नेटवर्क का विस्तार, जरूरत के अनुसार एसटीपी का निर्माण, नए मास्टर प्लान तैयार करना और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था शामिल है।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नगर निकायों के काम और उनकी प्रगति की जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध कराने तथा नागरिकों से ऑनलाइन आवेदन लेने की व्यवस्था करने का भी वादा किया गया है।
डोटासरा ने कहा कि सभी 309 नगर निकायों के लिए जिला कांग्रेस कमेटियां स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग घोषणा पत्र जारी करेंगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी नगर निकाय चुनावों में बीजेपी सरकार के कथित “कुशासन” के खिलाफ जनता के बीच जाएगी और स्थानीय निकायों में “भ्रष्टाचार मुक्त” प्रशासन देने का प्रयास करेगी।

