कैबिनेट के बड़े फैसले:वाराणसी ग्रीन कॉरिडोर,सेमीकॉन 2.0 और मोबाइल निर्माण योजना समेत कई प्रस्तावों को मंजूरी

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को बुनियादी ढांचे, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, उर्वरक और रेलवे से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी। इनमें वाराणसी में गंगा के किनारे 14,447 करोड़ रुपये की लागत से एलिवेटेड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, सेमीकॉन 2.0, मोबाइल फोन निर्माण योजना (MPMS), यूरिया क्षेत्र के लिए नई निवेश नीति और ओडिशा-झारखंड में रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं शामिल हैं।

सरकार के अनुसार, वाराणसी ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग-19 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगा। 46 किलोमीटर लंबी इस परियोजना से शहर में यातायात का दबाव कम होगा और प्रमुख मार्गों पर यात्रा का समय लगभग एक घंटे से घटकर 20 मिनट तक रह जाने की उम्मीद है। परियोजना में गंगा पर केबल-स्टेड ब्रिज, पैदल यात्रियों के लिए विशेष पुल और कई कनेक्टिविटी ढांचे भी शामिल हैं।

कैबिनेट ने 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजट के साथ सेमीकॉन 2.0 को भी मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य भारत में चिप डिजाइन, निर्माण, अनुसंधान, उन्नत फैब्रिकेशन और कौशल विकास को बढ़ावा देकर देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में मजबूत उपस्थिति दिलाना है।

मोबाइल फोन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को भी मंजूरी दी। सरकार का कहना है कि पांच वर्षों की इस योजना से घरेलू उत्पादन और निर्यात बढ़ेगा, भारतीय ब्रांडों को प्रोत्साहन मिलेगा और करीब 60 हजार प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है।

उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति फॉर यूरिया-2026 (NIPU-2026) को मंजूरी दी गई है। नई नीति के तहत गैस आधारित यूरिया संयंत्रों में निवेश को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा, कैबिनेट ने ओडिशा और झारखंड में करीब 3,907 करोड़ रुपये की लागत वाली दो रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी, रेल नेटवर्क मजबूत होगा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार होगा।