जयपुर, 14 अक्टूबर 2025 —
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के विद्यार्थियों ने मंगलवार को जेईसीसी, सीतापुरा में भारत सरकार द्वारा आयोजित नई न्याय व्यवस्था से जुड़ी विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) से जुड़ी जानकारी दी गई।
संस्थान के 103 विद्यार्थियों के साथ सात चिकित्सक और कर्मचारी भी उपस्थित रहे। प्रदर्शनी के दौरान छात्रों ने महिला सुरक्षा, फॉरेंसिक साइंस (FSL), डिजिटल साक्ष्य, DNA टेस्टिंग और ऑनलाइन रिपोर्टिंग जैसे आधुनिक तकनीकी पहलुओं को करीब से देखा।
विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बताया कि नई न्याय संहिता का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, त्वरित और नागरिक-केंद्रित बनाना है। एफएसएल टीम ने मौके पर नई तकनीकों का लाइव प्रदर्शन किया, जिससे छात्रों को समझ आया कि विज्ञान और न्याय प्रणाली के बीच सहयोग से कानून व्यवस्था को कैसे अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
संस्थान के कुलपति प्रोफेसर संजीव शर्मा ने कहा कि संस्थान विद्यार्थियों को केवल आयुर्वेदिक ज्ञान तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय नीतियों और समसामयिक विषयों से जोड़ने का भी प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की शैक्षणिक यात्राएँ युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करती हैं।
इस अवसर पर डॉ. महेन्द्र प्रसाद प्रजापति, डॉ. रितेश रामनानी, डॉ. पुनीत चतुर्वेदी, डॉ. प्रीति गवली, डॉ. अभिजीत कुम्भार, डॉ. मुनिराज और डॉ. पूजा रानी भी मौजूद रहे। डॉ. प्रजापति ने कहा कि नई न्याय व्यवस्था नागरिकों में कानून के प्रति विश्वास बढ़ाने और अपराध जांच को वैज्ञानिक आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी के माध्यम से कानून, विज्ञान और प्रशासनिक प्रणाली के बीच समन्वय को समझा और जाना कि आधुनिक न्याय सुधार समाज में सुरक्षा और विश्वास की भावना को मजबूत करने में कैसे सहायक हैं।

