अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया दावों को लेकर कांग्रेस ने शनिवार को केंद्र सरकार को घेरा और तीन अहम सवाल उठाए। ट्रम्प ने दावा किया था कि भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष के दौरान उन्होंने संघर्षविराम (सीजफायर) रुकवाया और पांच फाइटर जेट गिराए गए थे। कांग्रेस ने इस पर जवाब मांगते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद में खुद सफाई देनी चाहिए।
कांग्रेस का पहला सवाल है कि क्या ट्रम्प ने सचमुच सीजफायर रुकवाया, क्योंकि वे इसे 24 बार दोहरा चुके हैं? दूसरा, क्या भारत सरकार ने ट्रम्प की व्यापारिक धमकी के दबाव में कदम पीछे खींचे? तीसरा, ट्रम्प जिन पांच लड़ाकू विमानों के गिरने की बात कर रहे हैं, वे किस देश के थे?
ट्रम्प का दावा और विवाद
डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में रिपब्लिकन सांसदों के साथ डिनर के दौरान कहा था, “मुझे लगता है भारत-पाक संघर्ष में सच में पांच जेट गिरे थे।” हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये विमान भारत के थे या पाकिस्तान के।
कांग्रेस और विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को संसद में खुद जवाब देना होगा। उन्होंने कहा, “हमें कोई सब्स्टीट्यूट बल्लेबाज़ नहीं चाहिए, केवल प्रधानमंत्री को ही बयान देना होगा।”
जयराम रमेश ने मोदी और ट्रम्प की पुरानी नजदीकी का हवाला देते हुए हाउडी मोदी और नमस्ते ट्रम्प जैसे आयोजनों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि अब जब ट्रम्प बार-बार ऐसे गंभीर दावे कर रहे हैं, तो प्रधानमंत्री की चुप्पी सवालों के घेरे में है।
आम आदमी पार्टी की प्रतिक्रिया
AAP ने भी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को घेरते हुए कहा कि ट्रम्प बार-बार इशारा कर रहे हैं कि भारत ने व्यापारिक धमकी के कारण आत्मसमर्पण किया, लेकिन प्रधानमंत्री अब तक खामोश हैं।
पार्टी ने कहा, “56 इंच के सीने की बात करने वाले प्रधानमंत्री अब तक एक शब्द नहीं बोले हैं। क्या भारत की गरिमा को ठेस पहुंची है?”
पहले भी उठा चुकी है कांग्रेस सवाल
- 18 जून: अमेरिकी जनरल कुरिल्ला द्वारा पाकिस्तान को ‘आतंक के खिलाफ शानदार सहयोगी’ बताए जाने पर कांग्रेस ने सवाल उठाया कि अमेरिका को ऐसे देश को सहयोगी क्यों मानना चाहिए जिसने ओसामा बिन लादेन को पनाह दी थी?
- 6 जून: कांग्रेस ने पूछा था कि क्या ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अमेरिकी दबाव में रोका गया?
- 3 जून: राहुल गांधी ने भोपाल में कहा था कि ट्रम्प का एक फोन आया और “नरेंद्र जी तुरंत सरेंडर हो गए।” उन्होंने बीजेपी-आरएसएस पर हमला करते हुए कहा कि ये ताकत के आगे हमेशा झुकते हैं।
संसद सत्र में उठ सकता है मुद्दा
21 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में कांग्रेस और विपक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार पर इस मामले में दबाव बढ़ सकता है, खासकर तब, जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहस छिड़ रही है।

