नई दिल्ली, 12 अक्टूबर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को नई दिल्ली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एवं INDIA गठबंधन के आह्वान पर निकाले गए मार्च को जम्हूरियत की रक्षा के लिए चल रहे जन आंदोलन में मील का पत्थर बताते हुए कहा कि राहुल गांधी एवं INDIA गठबंधन ने वोट चोरी के खिलाफ देशव्यापी संघर्ष को नई धार दी है। दिल्ली में देशभर से आए लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। बड़ी संख्या में युवाओं, विशेषकर जेन-जी की भागीदारी ने स्पष्ट कर दिया है कि देश की युवा शक्ति लोकतंत्र, संविधान और अपने मताधिकार की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से आगे आ रही है। इस मार्च ने यह भी साबित कर दिया है कि गांधीवादी विचारधारा आज भी देश में मजबूत है और आम जनता तानाशाही के खिलाफ अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने को तैयार है।
गहलोत ने कहा कि दिल्ली में ‘वोट चोरों’ का हिसाब करने के लिए INDIA गठबंधन के आह्वान पर उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि जनता ने लोकतंत्र को कमजोर करने वाली ताकतों के खिलाफ आवाज बुलंद करने का संकल्प लिया है। यह संघर्ष किसी एक नेता, राजनीतिक दल या संगठन का नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि आज दिल्ली की सड़कों का नजारा देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को यह एहसास हो गया होगा कि भारत में नई क्रांति का आगाज हो चुका है। अब जनता अपने मताधिकार की रक्षा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए एकजुट हो रही है। इस जनजागरण को दबाया नहीं जा सकता।
गहलोत ने कहा कि पूरे देश में यह सवाल उठ रहा है कि भाजपा सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बचाव में इस हद तक क्यों जा रही है। चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता और निष्पक्षता लोकतंत्र की बुनियाद है। आयोग को अपने ऊपर उठ रहे सवालों का जवाब स्वयं सामने आकर देना चाहिए। इसके बजाय केंद्र सरकार द्वारा आयोग के आलोचकों के खिलाफ अभूतपूर्व कार्रवाई की अनुमति दिए जाने से आयोग की स्वायत्तता और उसकी विश्वसनीयता को और नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने वर्षों में अपनी स्वतंत्र पहचान और स्वायत्तता स्थापित की है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियां इन संवैधानिक मूल्यों को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर रही हैं। लोकतंत्र में जनता के सवालों का जवाब देना और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता बनाए रखना सरकार तथा संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है।

