नई दिल्ली: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह तथा पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में बरी कर दिया है।
यह मामला 2023 में उस समय चर्चा में आया था, जब विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया समेत कई पहलवानों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करते हुए बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल की थी।
करीब तीन साल तक चले मुकदमे के दौरान अदालत में 127 सुनवाई हुईं और 32 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे सोमवार को सुनाते हुए दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।
फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्होंने शुरू से ही खुद को निर्दोष बताया था और यदि कोई आरोप साबित होता तो वह उसकी जिम्मेदारी स्वीकार करते। उन्होंने फैसले को न्यायपालिका पर अपने विश्वास की जीत बताया।
उधर, महिला पहलवानों ने अदालत के फैसले पर निराशा जताई है। विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया ने कहा कि वे इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। उनका कहना है कि न्यायिक लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। विपक्ष के कई नेताओं ने फैसले पर सवाल उठाए हैं, जबकि बृजभूषण शरण सिंह के समर्थकों और भारतीय कुश्ती महासंघ से जुड़े लोगों ने अदालत के निर्णय का स्वागत किया है।
यह मामला भारतीय खेल जगत के सबसे चर्चित विवादों में से एक रहा, जिसने खिलाड़ियों की सुरक्षा, खेल संस्थाओं की जवाबदेही और शिकायत निवारण व्यवस्था को लेकर देशभर में व्यापक बहस को जन्म दिया। अब इस मामले की अगली कानूनी दिशा हाईकोर्ट में संभावित अपील पर निर्भर करेगी।

