जयपुर, 7 अगस्त: भारत की अध्यक्षता में जयपुर में आयोजित 16वीं BRICS व्यापार मंत्रियों की बैठक संपन्न हो गई। बैठक में सदस्य देशों ने बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को मजबूत करने, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच दिलाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक लचीला बनाने पर सहमति जताई।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने की। इसमें ब्राजील, चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, ईरान, इंडोनेशिया, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित BRICS देशों के व्यापार मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
बैठक के बाद चेयर स्टेटमेंट और आउटकम डॉक्यूमेंट जारी किया गया, जिसमें चार परिशिष्ट (Annexes) शामिल हैं। सदस्य देशों ने BRICS Economic Partnership Strategy 2030 को अंतिम रूप देने की दिशा में भारत की पहल की सराहना की।
भारत ने बैठक में विश्व व्यापार संगठन (WTO) को केंद्र में रखते हुए नियम-आधारित, समावेशी और विकासोन्मुख बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था की वकालत की। साथ ही विकासशील देशों के लिए विशेष और विभेदक व्यवहार (Special and Differential Treatment) को बनाए रखने तथा खाद्य और आजीविका सुरक्षा से जुड़े हितों की रक्षा पर जोर दिया।
बैठक में MSMEs के लिए ‘जयपुर कंसेंसस’ अपनाया गया। इसके तहत छोटे उद्यमों के लिए व्यापार वित्त तक पहुंच आसान बनाने, निर्यात-उन्मुख MSMEs के लिए नए क्रेडिट मूल्यांकन ढांचे पर काम करने और वैश्विक व्यापार वित्त की कमी को कम करने की दिशा में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
इसके अलावा, BRICS देशों ने वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) को अधिक मजबूत और विविध बनाने के लिए 2026-2030 की कार्ययोजना को भी मंजूरी दी। इसमें तकनीकी सहयोग, निवेश बढ़ाने और दवा एवं खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में सीमा-पार डिजिटल सेवाओं को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए साझा सिद्धांतों को भी अपनाया गया। भारत ने नवाचार आधारित विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से BRICS Incubator Network और BRICS Startup Innovation Fund जैसी पहलों का भी समर्थन किया।
भारत ने कहा कि बैठक के निष्कर्ष किसानों के हितों की सुरक्षा, छोटे उद्यमों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। साथ ही, इन पहलों को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के अनुरूप बताया गया।

