राजस्थान के उद्योग मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने दावा किया है कि पिछले 22 महीनों में राज्य देश और विदेश के निवेशकों के लिए एक प्रमुख गंतव्य बनकर उभरा है। उनके मुताबिक उद्योग स्थापना से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और तेज़ बनाया गया है, जिसका सीधा असर निवेश के स्तर पर दिखाई दे रहा है।
मंत्री राठौड़ ने बताया कि हाल ही में हुए निवेश प्रयासों में 32 देशों ने हिस्सा लिया और करीब ₹35 लाख करोड़ के समझौते किए गए। इस अवधि में राज्य में 33 नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास हुआ, जबकि 1952 प्लॉट्स का आवंटन किया गया। साथ ही 3100 से अधिक MSMEs को विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता मिली है।
उन्होंने कहा कि जमीन आवंटन से लेकर फ़ैक्टरी और बॉयलर की अनुमति तक, अधिकतर प्रक्रियाएँ अब ऑनलाइन हो चुकी हैं। MSME इकाइयों को 30 दिनों के भीतर मंज़ूरी दी जाती है और तय समय सीमा में देरी होने पर आवेदन स्वतः अनुमोदित माना जाता है। इसके अलावा 10 कर्मचारियों तक की दुकानों के लिए रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है।
उद्योग सुरक्षा और बुनियादी ढाँचे को लेकर भी कई कदम उठाए गए हैं। छह प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में फायर टेंडर की व्यवस्था की गई है, जबकि 281 किमी लाइन अपग्रेडेशन, 210 किमी अंडरग्राउंड केबलिंग और 5845 स्ट्रीट लाइटों की स्थापना के साथ औद्योगिक ढांचे पर कुल ₹2777 करोड़ खर्च किए गए हैं।
राज्य सरकार ने 45 पुराने कानून समाप्त किए हैं और 877 उद्योगों को पर्यावरणीय अनुमति से छूट दी है। भूमि संबंधी जानकारी अब ऑनलाइन मानचित्र पर उपलब्ध है और शिकायत निवारण प्रणाली भी पूरी तरह डिजिटलाईज़्ड कर दी गई है।
कर्नल राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में “Minimum Government, Maximum Governance” और “Maximum Transparency, Maximum Trust” जैसे सिद्धांतों को ज़मीन पर उतारा गया है। उनके मुताबिक सरल प्रक्रियाओं और बेहतर सुविधाओं के साथ राजस्थान का संदेश स्पष्ट है—राजस्थान अब पूरी तरह ‘ओपन फॉर बिज़नेस’ है।

