नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बुधवार को रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी समेत ऊर्जा और दिल्ली के ट्रैफिक प्रबंधन से जुड़े कई बड़े फैसलों को मंजूरी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में रबी मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए छह प्रमुख फसलों की MSP बढ़ाने का फैसला किया गया।
सरकार के मुताबिक, MSP में सबसे ज्यादा 675 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कुसुम (Safflower) के लिए की गई है। इसके बाद रेपसीड और सरसों की MSP में 413 रुपये, मसूर में 390 रुपये, जौ में 136 रुपये, चने में 83 रुपये और गेहूं में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।
नई दरों के मुताबिक गेहूं की MSP 2,610 रुपये, जौ की 2,286 रुपये, चने की 5,958 रुपये, मसूर की 7,390 रुपये, रेपसीड-सरसों की 6,613 रुपये और कुसुम की MSP 7,215 रुपये प्रति क्विंटल होगी।
सरकार का कहना है कि इन दरों को उत्पादन लागत के मुकाबले कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर रखने के लक्ष्य के अनुरूप तय किया गया है। सरकार के अनुमान के मुताबिक गेहूं पर लागत के मुकाबले 106 फीसदी, रेपसीड-सरसों पर 96 फीसदी और मसूर पर 92 फीसदी का मार्जिन रहेगा।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के तीसरे चरण को मंजूरी
कैबिनेट ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III को भी मंजूरी दी है। इस योजना के तहत राज्यों के भीतर बिजली के ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा, ताकि 135 गीगावाट तक की अक्षय ऊर्जा को ग्रिड में पहुंचाया जा सके।
योजना के तहत 50 GWh क्षमता वाले बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी लगाए जाएंगे। सरकार के मुताबिक इसका इस्तेमाल बिजली की मांग और आपूर्ति में अंतर, ग्रिड पर दबाव और पीक आवर्स के दौरान बिजली प्रबंधन में किया जा सकेगा।
इस परियोजना का कुल अनुमानित खर्च 1.86 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता 54,082 करोड़ रुपये होगी। योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार के अनुसार, यह योजना 2035 तक देश में 900 गीगावाट स्थापित गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य में मदद करेगी। इसके साथ ही ऊर्जा क्षेत्र, विनिर्माण और निर्माण गतिविधियों में रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
दिल्ली में 1,789 करोड़ रुपये का स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लागू करने के लिए 1,789.52 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
यह सिस्टम दिल्ली के 42 प्रमुख ट्रैफिक कॉरिडोर में तीन चरणों में लागू किया जाएगा। परियोजना को 24 महीने में पूरा करने और उसके बाद पांच साल तक संचालन एवं रखरखाव की योजना है।
इसके तहत ट्रैफिक सिग्नल को ट्रैफिक की स्थिति के हिसाब से अपने आप बदलने वाली तकनीक, रियल-टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग और तकनीक आधारित ट्रैफिक नियमों के पालन की व्यवस्था की जाएगी।
इस सिस्टम में 1,092 एडाप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम और 1,029 इंफोर्समेंट लोकेशन शामिल होंगी।
एंबुलेंस को प्राथमिकता, हादसों पर तेजी से कार्रवाई
सरकार के मुताबिक, नए सिस्टम से एंबुलेंस और दूसरे आपातकालीन वाहनों को ट्रैफिक में प्राथमिकता देने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाए जा सकेंगे।
रियल-टाइम डेटा के जरिए जाम, दुर्घटना और सड़क पर अन्य घटनाओं की पहचान कर ट्रैफिक को डायवर्ट करने में भी मदद मिलेगी। डिजिटल डिस्प्ले और अन्य माध्यमों से यात्रियों को जाम, डायवर्जन, पार्किंग और ट्रैफिक की स्थिति की जानकारी देने की योजना है।
AI आधारित तकनीक के जरिए रेड लाइट जंप करने, तेज रफ्तार, गलत दिशा में वाहन चलाने, हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करने तथा अवैध पार्किंग जैसे उल्लंघनों की निगरानी भी की जाएगी।
सरकार का दावा—ट्रैफिक और ऊर्जा दोनों क्षेत्रों में तकनीक पर जोर
केंद्र सरकार के इन फैसलों में एक तरफ किसानों के लिए रबी फसलों की MSP बढ़ाने और दूसरी तरफ ऊर्जा तथा शहरी परिवहन ढांचे को तकनीक से मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
सरकार के अनुसार, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर से अक्षय ऊर्जा को ग्रिड से जोड़ने की क्षमता बढ़ेगी, जबकि दिल्ली का ITMS मौजूदा सड़क नेटवर्क को रियल-टाइम ट्रैफिक प्रबंधन के जरिए अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने में मदद करेगा।

