मुंबई, 19 जुलाई। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि मराठा और भारत के इतिहास को अलग करके नहीं देखा जा सकता। बहुत छोटे मन के लोग होंगे, जो शायद इस तरह की बातें, चर्चाएं और विभेद अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए पैदा करना चाहते होंगे। उन्होंने कहा कि मैंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात की है। महाराष्ट्र और भारत सरकार मिलकर टूरिस्ट अमिनिटीज को डेवलप करने के लिए आने वाले समय में काम करेंगे। डोमेस्टिक टूरिज्म के साथ-साथ इंटरनेशनल टूरिज्म का विस्तार मराठा मिलिट्री लैंडस्केप के किलों पर होने वाला है।
शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार के “कर्तव्यपूर्ति” समारोह में केंद्रीय मंत्री ने उक्त बातें कहीं। समारोह “राष्ट्र गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज” की महागाथा गाते 12 किलों को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर की मान्यता मिलने पर केंद्रित था। समारोह में कॉफी टेबल बुक “मराठा मिलिट्री लैंडस्केप ऑफ इंडिया” का विमोचन भी किया। अपने उद्बोधन में शेखावत ने कहा कि ये अजेय किले भारत में स्वराज की संस्कृति के भी द्योतक हैं। शिवाजी महाराज को आदर्श मानने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मार्गदर्शन इन्हें वैश्विक मान्यता दिलाने के प्रयास को सफल बनाने में मुख्य प्रेरणा रहा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मैं राजस्थान की धरती में पैदा हुआ हूं। राजस्थान के लोगों से ज्यादा गढ़ और किले की महत्ता कोई नहीं जान सकता। जैसलमेर का पुराना किला 1000 साल तो जोधपुर, जहां का मैं प्रतिनिधित्व करता हूं, का मंडोर किला 1200-1300 साल पुराना है। मेहरानगढ़ का किला 600 साल से देश पर हुए अनेक आक्रमणों का साक्षी रहा है।
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंत्र है कि हम विरासत का संरक्षण करते हुए विकास करेंगे। पिछले 11 साल में उनके नेतृत्व में काम करते हुए भारत की प्रतिष्ठा और महत्ता जिस तरह से बदली है, भारत की ताकत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बढ़ी है, ये उसका स्पष्ट प्रमाण है कि मराठा मिलिट्री लैंडस्केप को विश्व हेरिटेट रजिस्टर में प्रामाणिकता मिली। शेखावत ने बताया कि प्रधानमंत्री निरंतर इस विषय की चिंता कर रहे थे। जब यूनेस्को में इस विषय को लेकर आखिरी समय आया, तब भी उन्होंने मुझे फोन पर कहा कि गजेंद्र क्या तैयारी की है? किस तरह से तैयारी की? उन्होंने हर छोटी-छोटी चीज की बात की।
शेखावत ने कहा कि दुनिया के बहुत सारे ऐसे देश हैं, जिनके पास ऐसी विरासत और धरोहर तो हैं, लेकिन उनके पास में डोजियर्स और इतने टेक्निकल डॉक्यूमेंट नहीं होते हैं। जब हम द वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी की मीटिंग दिल्ली में आयोजित कर रहे थे, तब प्रधानमंत्री ने मुझे इस बात के लिए चर्चा की। उन्होंने कहा था कि दुनिया के दूसरे देशों की हैंड होल्डिंग करके, जो असमर्थ हैं, उनको समर्थ बनाने की कैपेसिटी बिल्डिंग के लिए काम करने की जिम्मेदारी भी भारत की है। प्रधानमंत्री ने एक मिलियन डॉलर की यूनेस्को को इसके लिए ग्रांट देने की घोषणा की थी, ताकि हम दूसरे देशों का भी कैपेसिटी बिल्डिंग कर सकें।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत आज सांस्कृतिक पुनर्जागरण के दौर से गुजर रहा है। पिछले 11 वर्ष में जिस तरह से समय परिवर्तित हुआ है। हम अपनी संस्कृति, सांस्कृतिक मूल्यों, सांस्कृतिक विविधताओं, संस्कृति की गहराई, संस्कृति की ऊंचाई पर गर्व करते हुए भारत को आगे बढ़ा रहे हैं। हमने तकनीक, आर्थिक और सामरिक दृष्टि से अपने आपको आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इन सबके साथ-साथ में हमारी सांस्कृतिक ताकत, सांस्कृतिक विविधता और विविधता की ताकत भारत को पूरे विश्व में वंदनीय बनाएगी। उन्होंने बताया कि भारत की मैनुस्क्रिप्ट्स को हम डिजिटाइज करने पर काम कर रहे हैं। आने वाले तीन-चार साल में एक करोड़ से ज्यादा मैनुस्क्रिप्ट्स को डिजिटाइज करके भारत का ज्ञान पूरी दुनिया में पहुंचाएंगे। समारोह में महाराष्ट्र के संस्कृति मंत्री आशीष शेलार भी उपस्थित रहे।

