सिद्धारमैया ने 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया,चुनावी राजनीति से संन्यास की घोषणा

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रिपोर्ट: हर्षित नागदा

बेंगलुरु। कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने वर्ष 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान करते हुए चुनावी राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की है। 79 वर्षीय नेता ने कहा कि बढ़ती उम्र, स्वास्थ्य संबंधी कारणों और राजनीति के बदलते स्वरूप को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सार्वजनिक जीवन और जनसेवा से दूर नहीं होंगे।

मांड्या जिले के के.आर. पेट में आयोजित एक कार्यक्रम में सिद्धारमैया ने कहा कि आज की राजनीति पहले जैसी नहीं रही और चुनावों में विचारधारा की तुलना में धनबल और संसाधनों की भूमिका बढ़ी है। उन्होंने कहा कि अब वे चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन लोगों के मुद्दों को उठाने और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय रहेंगे।

सिद्धारमैया का राजनीतिक सफर करीब पांच दशक लंबा रहा है। उन्होंने 1978 में तालुक बोर्ड सदस्य के रूप में राजनीति की शुरुआत की और बाद में जनता परिवार, जनता दल तथा कांग्रेस के साथ कर्नाटक की राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने उपमुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, विपक्ष के नेता और दो बार मुख्यमंत्री सहित कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं।

वर्ष 2013 में कांग्रेस की जीत के बाद वह पहली बार मुख्यमंत्री बने और अपना कार्यकाल पूरा करने वाले पहले कांग्रेस मुख्यमंत्री बने। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद उन्होंने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला।

अपने राजनीतिक जीवन में सिद्धारमैया ने कई चुनावी जीत और हार दोनों का सामना किया। 1983 में पहली बार विधायक बनने के बाद उन्होंने कई बार विधानसभा चुनाव जीते, जबकि कुछ चुनावों में उन्हें हार भी मिली। 2023 में उन्होंने वरुणा सीट से जीत दर्ज कर एक बार फिर विधानसभा पहुंचने में सफलता हासिल की।

सिद्धारमैया को कर्नाटक में पिछड़े वर्गों, किसानों और सामाजिक न्याय की राजनीति के प्रमुख चेहरों में गिना जाता है। उनके कार्यकाल में कल्याणकारी योजनाओं, शिक्षा, ग्रामीण विकास और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया।

उनकी घोषणा के बाद कांग्रेस के भीतर भविष्य के नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी राजनीति से उनके हटने के बावजूद संगठन और रणनीति के स्तर पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण बनी रह सकती है।

घोषणा के बाद उनके समर्थकों ने उनसे अपना फैसला बदलने की अपील की, लेकिन सिद्धारमैया ने कहा कि चुनाव नहीं लड़ने का उनका निर्णय अंतिम है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की सेवा केवल चुनाव लड़कर ही नहीं, बल्कि समाज के मुद्दों को उठाकर भी की जा सकती है और वे आगे भी इसी भूमिका में सक्रिय रहेंगे।