नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वर्षभर चलने वाले समारोह की शुरुआत की। नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि “वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का मंत्र, एक ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है।”
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने ‘वंदे मातरम्’ पर आधारित विशेष स्मारक डाक टिकट और स्मारक सिक्का भी जारी किया। देशभर में एक साथ राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन के साथ यह समारोह आरंभ हुआ।
मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ हर भारतीय के दिल की आवाज़ था। उन्होंने कहा,
“यह गीत हमें हमारे इतिहास से जोड़ता है, वर्तमान को आत्मविश्वास से भरता है और भविष्य के लिए साहस देता है।”
प्रधानमंत्री ने बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस गीत को भारतीय सभ्यता की आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि यह गीत उस दौर में लिखा गया जब भारत विदेशी शासन की बेड़ियों में बंधा था, लेकिन उसमें एक स्वतंत्र और समृद्ध भारत का सपना झलकता था।
मोदी ने कहा,
“वंदे मातरम् ने ब्रिटिश प्रचार को तोड़ा, जिसने भारत को कमजोर बताने की कोशिश की थी। यह गीत भारत की आत्मनिर्भरता और सामर्थ्य का प्रतीक बना।”
उन्होंने कहा कि आज जब भारत आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और विकसित भारत के संकल्प की ओर अग्रसर है, तब हर उपलब्धि पर “वंदे मातरम्” का स्वर गूंजता है।
“जब हमारी बेटियां फाइटर जेट उड़ाती हैं, जब भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचता है, तब हर भारतीय के दिल से यही पुकार उठती है — वंदे मातरम्,” प्रधानमंत्री ने कहा।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने ‘वंदे मातरम्’ पोर्टल भी लॉन्च किया, जिसके माध्यम से नागरिक अपना स्वयं का संस्करण रिकॉर्ड कर अपलोड कर सकेंगे।
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी आज के भारत के “वैश्विक स्वर” हैं।
“वंदे मातरम् ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश को एक सूत्र में बांधा था, और आज भी यह गीत उतना ही प्रासंगिक है। यह विकसित भारत के जन आंदोलन का मंत्र बन सकता है,” शेखावत ने कहा।
सरकार ने घोषणा की है कि 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक पूरे वर्षभर देशभर में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया जाएगा। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सामूहिक गायन और जनभागीदारी के जरिए राष्ट्रगीत के संदेश — एकता, सम्मान और राष्ट्रभक्ति — को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।
“भारत ने इतिहास के उतार-चढ़ाव देखे हैं, पर हर बार स्वर्ण की तरह निखरकर उभरा है। वंदे मातरम् की भावना ही हमें विकसित भारत की दिशा में ले जाएगी।”
— प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

