राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय परसराम मदेरणा की जयंती पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उन्हें याद करते हुए कहा कि आज़ादी के बाद किसानों की आवाज़ बनने में मदेरणा जी की अहम भूमिका रही। उन्होंने कहा कि उस दौर में जब किसान अपनी ज़मीन के भी मालिक नहीं थे, तब मदेरणा जैसे नेता सामने आए जिन्होंने किसानों के हक़ के लिए आवाज़ बुलंद की।
गहलोत ने मदेरणा को याद करते हुए कहा, “वे एक अलग ही व्यक्तित्व थे। बतौर राजस्व मंत्री और PHED मंत्री रहते हुए उन्होंने विधानसभा के भीतर और बाहर एक अमिट छाप छोड़ी। उनके कार्यकाल में रेवेन्यू से जुड़े सभी नियम-कानून उनके उंगलियों पर होते थे। हम जोधपुर से हैं, वो भी जोधपुर से थे — हमें उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला।”
उन्होंने कहा कि आज मदेरणा की जयंती पर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी इस बात का प्रतीक है कि लोगों में आज भी उनके लिए आदर और आस्था है। गहलोत ने यह भी कहा कि “ऐसी शख्सियतों की मूर्तियां लगाई जाती हैं ताकि युवा पीढ़ी प्रेरणा ले सके और उनके जीवन से सीखकर आगे बढ़ सके।”
धनखड़ के इस्तीफे पर कांग्रेस की भूमिका को बताया स्पष्ट, संवैधानिक गरिमा की दी याद दिलाई
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर पूछे गए सवाल के जवाब में गहलोत ने कहा कि कांग्रेस की स्थिति इस मामले में बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस ने पहले ही अविश्वास प्रस्ताव लाकर अपनी असहमति दर्ज की थी और अब जब धनखड़ ने इस्तीफा दिया है, तो इस पर चर्चा लाजमी है।
गहलोत ने कहा, “ये संवैधानिक पद होते हैं — राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा स्पीकर, राज्यसभा चेयरमैन — इनकी अपनी गरिमा होती है। जिस तरह से धनखड़ का इस्तीफा हुआ, वह चौकाने वाला था। मेरी जानकारी में उनका स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक था, दिनभर काम भी किया और शाम को अचानक इस्तीफा दे दिया गया। आखिर ऐसा क्या हुआ?”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि “कई बार चेयर पर बैठे लोग बायस्ड हो जाते हैं। लेकिन मदेरणा साहब जैसे नेता जब स्पीकर बने थे, तो उन्होंने बेहद निष्पक्ष होकर सदन चलाया था। ऐसी ही निष्पक्षता संवैधानिक पदों की गरिमा को बनाए रखती है।”
गहलोत ने अंत में कहा कि कांग्रेस यह मानती है कि प्रधानमंत्री को स्वयं इस मुद्दे पर संवाद करना चाहिए था, ताकि कोई भ्रम की स्थिति न बनती।

